पंडित अनिल शर्मा जी की रचनायें

साँच नींम ?? साँच को सुन कर पचाना, क्या कहें । सुन के मीठा मुस्कराना , क्या कहें ।। एक नस्तर सा है चुभता, साँच से। उतना दिल न जल धधकी आँच से।। झूठ का मुख पे ख़ज़ाना क्या कहें। सुन••••••••• झूठ चलता लज्जतों से शान से । मेवे मिसिरी भोगते आराम से ।। साँच … Continue reading पंडित अनिल शर्मा जी की रचनायें