महाराणा प्रताप जी अपने एक ही वार में घोड़े सहित, दुश्मन को काट डालते थे। वह परम स्वाभिमानी शिवभक्त थे जिनके नाम से ही दिल्ली की बादशाहत कांप जाया करती थी। उन्होंने जंगलों में रहना स्वीकार किया लेकिन कभी भी अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की।
72 किलो का भाला, 81 किलो का छाती कवच और 208 किलो के भारी वजन के साथ महाराणा युद्ध भूमि में निकलते थे। उनके रौद्र रूप को देख, सामने वाला दुश्मन, अपना रास्ता पलट देता था।

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