#आज़ादी का अमृत महोत्सव
चुवाड़ी रायपुर के श्री ब्रह्मानंद जी थे सुभाषचंद्र बोस के सिपाही
दोस्तो आज पूरे देश मे आज़ादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। आज आपको मैं एक ऐसे ही जाबाज़ योद्धा से मिलाने जा रहा हूँ जो इतिहास की किताबों में कभी छप नही सका क्योंकि हमें सिर्फ वही पढ़ाये गए जो वो पढ़ाना और बताना चाहते थे। मैं आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहा हूँ जो सुभाष चन्द्र बोस जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चले और जापान, वर्मा और सिंगापुर तक गए। इनका नाम था श्री ब्रह्मानंद सुपुत्र श्री सरनदास गाँव रायपुर तह भट्टियात जिला चम्बा।
जन्म :- 20-08-1922
वर्मा की जेल में काटी कैद :- ये महान स्वतंत्रता सेनानी वर्मा में कैद रहे। अपने देश की खातिर जान तक देने को तैयार ब्रह्मानंद जी ने वँहा बहुत मुश्किल समय व्यतीत किया। पराए मुल्क में भी अपने सीने में आज़ाद की ज्वाला लिए बैठे रहे।
भारत सरकार के रिकॉर्ड में युद्धबंदी :- श्री ब्रह्मानंद जी को भारत सरकार द्वारा सर्टिफिकेट दिया गया है जिसमे साफ लिखा है कि इन्होंने 20 अगस्त 1940 में मात्र 18 वर्ष की आयु में भारतीय सेना में भर्ती हुए ओर 16 फरवरी 1942 तक जापान में युद्ध बंदी रहे। 10 जनवरी 1946 को सेवा निवृति दी गई।
जेल में कविता :- वर्मा की जेल में रहते हुए ब्रह्मानंद जी ने कविताएं लिखी उनकी कविता की कुछ पंक्तियां पूरी कविता समझ नही पाया

“हसरतें दिल मे रही और दिल रहा अरमान में,
जान ब्रह्मानंद फस गई तूफ़ान में , 8 तारीक बारवां महीना 1941का दिन था, सिंगापुर से बढ़ता रहा मैं जापान में,
अज़दियाँ और हसरतें हैं बादशाहो के लिए,
अफसोस है ब्रह्मानंद हर पल बेवतन कैद है जापान में”

ये सारी जानकारी उनके बेटे श्री तिलक शर्मा जी से प्राप्त हुये। उन्होंने अपने पिता की बहुत सी यादें आज भी सँजो कर रखी है। तिलक जी jbt शिक्षक हैं।

आशीष बहल
चुवाड़ी जिला चम्बा
8219331727