अनसुनी नही की जा सकती पुरानी पेंशन की मांग

विधानसभा के शीतकालीन सत्र में जब शनिवार 10 दिसम्बर को धर्मशाला की सड़कों पर जन सैलाब देखा तो हर कोई हैरान था कि ये वो सरकारी कर्मचारी हैं जो पूरी सरकार और पूरे हिमाचल को चलाते हैं। कोई ऐसा विभाग नही था जिसका कर्मचारी इसका हिस्सा नही था और कोई ऐसा व्यक्ति नही था जो नई पेंशन योजना जो सरकारों द्वारा थोपी गयी है उससे छुटकारा पाना नही चाहता हो। बस हर किसी की जुबां पर एक ही बात थी
एक ही माँग, एक ही नारा
पुरानी पैंशन हक हमारा
बिल्कुल हक हो भी क्यों न हो जो कर्मचारी सरकारी नीतियों को अमलीजामा पहनाते हैं फिर वो चपरासी से लेकर बड़ा अधिकारी हो, या फिर सरकार को चलाने वाले बेउरोक्रेट सबको पैंशन की जरूरत है। आज कर्मचारी सिर्फ अपने बुढ़ापे की लाठी मांग रहे हैं। सरकार को इस माँग की तरफ ध्यान देना भी पड़ा क्योंकि पूरे हिमाचल के कर्मचारी एक जायज माँग को लेकर एक मंच पर जो एकत्रित हो गए थे। इसलिए मुख्यमंत्री महोदय जी द्वारा ओल्ड पैंशन को जानने और समझने के लिए एक कमेटी को गठित करने की बात कही जो पुरानी पैंशन फिर से कैसे लागू की जा सकती है। जिसमें नई पैंशन कर्मचारी संघ के सदस्यों के साथ साथ आला अधिकारी भी होंगे जो नई पैंशन योजना के अंतर्गत आते हैं। अभी ये देखना होगा कि इससे क्या कर्मचारियों को कोई फायदा होता है या नही क्योंकि माँग एक ही है पुरानी पैंशन की बहाली इसके अलावा और कुछ नही।
कर्मचारी सरकारी व्यवस्था की रीढ़, दिल, दिमाग सब कुछ होते हैं क्योंकि ये इस व्यवस्था के स्थाई प्रतिनिधि है। सरकारें कोई भी आए कर्मचारी वर्ग निरन्तर देश के निर्माण में अपनी भागीदारी निभा रहा है। आज कर्मचारी वर्ग पूरे भारत वर्ष में सिर्फ एक ही मांग पर संगठित होकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है और वो है पुरानी पेंशन योजना की बहाली। दोस्तो पुरानी पेंशन और नई पेंशन के बीच मे कर्मचारियों का विभाजन 2003 में हुआ था। जब न्यू पेंशन स्कीम के तहत कर्मचारियों को ठगा गया। उस समय इस योजना को इस तरह पेश किया गया कि बस यही एक योजना है जो आपको जीते जी स्वर्ग दिखा देगी परन्तु हुआ ये कि जब कर्मचारी रिटायर्ड होना शुरू हुए तो जीते जी नरक में पँहुच गए। जो कर्मचारी 15 से 20 साल नोकरी करके सेवा निवृत हो रहे हैं उनको नई पेंशन के तहत 1000 से 1500 पेंशन मिल रही है। और तो ओर विडंबना ये है कि वो बी पी एल में भी नही आ सकते और बुढापा पेंशन भी नही ले सकते। ये कैसा न्याय है एक कर्मचारी अपनी पूरी ज़िंदगी मे सिर्फ नोकरी करता है उसे मिलने वाली एक एक पाई का उसके पास हिसाब रहता है उससे ज्यादा वो कभी कमा नही सकता और उस पर भी टैक्स देता है। अपनी मेनहत के कमाई का पैसा उससे जबरदस्ती शेयर मार्केट में NSDL कम्पनी के तहत लगवाया जाता है। उस पैसे के ऊपर किसी प्रकार की कोई गारंटी नही दी जाती अपने पैसे पर भी उसका कोई मालिकाना हक नही है। किसी प्रकार की जरूरत पर वो उसे निकलवा नही सकता अगर निकलवाना चाहे तो उसके लिए भी न जाने क्या क्या औपचारिकताएँ निभानी पड़ती है। किसी प्रकार की दुर्घटना होने पर परिवार को कुछ नही मिलता। कई परिवार सड़को पर आ गए, कई अपने बुढ़ापे को रो रहे है परन्तु हमारी सरकार है कि देख कर भी देखना नही चाहती। चलो ये भी बर्दाश्त कर लिया हमने परन्तु इस नई पेंशन का रोना बस यंही तक नही है इस न्यू पेंशन स्कीम में कोई भी कर्मचारी सेवानिवृत्त होने पर अपनी कुल बचत का सिर्फ 60 प्रतिशत ही निकालने का अधिकार रखता है। बाकी के बचे 40 प्रतिशत की आपको पेंशन लग जायेगी ओर वो भी फिक्स यानी उस 40 प्रतिशत के व्याज को ही पेंशन माना जाए।
किसी भी प्रकार का कोई मंहगाई भत्ता या अन्य लाभ कर्मचारियों को नही दिया जाता। अब ये कैसे एक बूढ़े कर्मचारी के हित मे हो सकता है ये गणित समझ से बाहर है और यदि ये फायदे की योजना है तो नेताओं और मंत्रियों को इनसे बंचित क्यों रखा है उन्हें भी इसी योजना में शामिल किया जाए। परन्तु हमारी सरकारें कर्मचारी की पेंशन को सरकारी खजाने पर भार समझती है जबकि पुरानी पेंशन कर्मचारी का अधिकार है। अभी न्यू पेंशन का प्रदेश संगठन हिमाचल सरकार से 2009 की नोटिफिकेशन जिसके तहत कर्मचारी की मृत्यु पर कर्मचारी के परिवार को पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जाना है उसे जे सी सी की बैठक में हिमाचल सरकार ने लागू करने का फैंसला लिया है। ये एक सराहनीय कदम है इससे उन परिवारों को थोड़ा सहारा मिलेगा जिनका कमाने वाला अब इस दुनिया मे नही रहा।
एक कर्मचारी इतना सक्षम नही हो पाता कि अपनी आजीविका के अतिरिक्त कुछ कमा सके इसलिए जब बुढ़ापे में 30 से 35 साल की नोकरी के बाद वो सेवा निवृत्त होता है तो उसके पास एक ही सहारा होता था वो थी पेंशन। ये पेंशन सिर्फ उसे आर्थिक रूप से ही मजबूत नही बनाती बल्कि परिवार में उस बुजुर्ग का सम्मान भी बनाये रखती थी। जब बुढ़ापे में इंसान अपने हाथ पांव से भी अक्षम हो जाता है तो ये पेंशन उसकी बुढ़ापे की लाठी बन जाती है। परन्तु आज सेवा निवृत्त हुआ कर्मचारी क्या कर रहा है मजदूरी, कबाड़ी का काम, रेहड़ी लगा रहा है ऐसा नही है कि इन कामों में कोई बुराई है परन्तु कर्मचारी वर्ग को सेवा निवृत्त होने के बाद सिर्फ मजबूर होकर ये काम करने पड़ रहे हैं। आज जगह जगह से कई ऐसे लोगों की दुःख भरी कहानियां सामने आ रही हैं जिसमें उनकी बदतर होती जिंदगी के बारे में सुनकर आँखे नम हो जाती हैं।
जब 2003 में नई पेंशन योजना की शुरुआत हुई थी तो भोले भाले कर्मचारियों को इसका थोड़ा भी अंदाजा नही था कि उन्हें ये स्कीम बेची जा रही है और इसकी कीमत पूरी ज़िंदगी होगी। आज हाथ मलने और गुहार लगाने के सिवा कोई चारा नही परन्तु अब ये चिंगारी भयानक आग का रूप ले रही है अब अधिकतर कर्मचारी वही है जो नई पेंशन से जुड़े हैं इनकी सँख्या हिमाचल में ही डेढ़ लाख के करीब है और अब हमारे देश की सरकारों पर ये प्रश्न चिन्ह लग गया है कि आखिर कौन इस पर फैंसला लेगा और कर्मचारियों को उनका हक पुरानी पेंशन लौटाएगा। आज की सरकारें भी भलि भांति जानती हैं कि पुरानी पेंशन आने वाले हर चुनाव में न सिर्फ मुख्य मुद्दा होने वाला है बल्कि इसके लिए जो प्रश्न जनता इनके सामने खड़े करेगी उससे भी बचा नही जा सकता। दरअसल पेंशन मिलने से सिर्फ पेंशन भोगी को ही फायदा नही होता अगर इसे दूरदर्शी तरीके से सोचा जाए तो इसका लाभ व्यापार से लेकर सारी अर्थ व्यवस्था पर रहता है। इसको इस तरीके से समझिए एक कर्मचारी जो रिटायर्ड होकर पेंशन पर जीवन यापन कर रहा है वो क्या करता है वो पेंशन के पैसे को बाजार में खर्च करता है अपनी हर प्रकार की जरूरत के लिए जिससे बाजार के व्यापारी वर्ग को फायदा मिलता है क्योंकि वो सेवा निवृत्त कर्मचारी अब कमाने वालो की जमात में नही है सिर्फ खर्च करेगा। जो थोड़ा बहुत बचेगा उसे बैंक में जमा करवाएगा उससे भी देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। अब जिसको पेंशन नही है वो क्या करेगा वो खर्च तो कर ही नही सकता उल्टा वो भी बाजार में कमाने वालो की जमात में आ जायेगा ओर जमा का तो मतलब ही नही अब इससे लाभ कौन कमा रहा है इस बात की समझ आज तक किसी को नही आई सरकार और देश को तो नई पेंशन से लाभ नही है न तो कर्मचारी की नोकरी के दौरान ओर न ही सेवा निवृत्त होने के बाद। अब सही समय है जब सरकार को जनता के हित में ये फैंसला लेना होगा और पुरानी पैंशन बहाल करके कर्मचारियों के बुढ़ापे को सुदृढ़ करना होगा।
आशीष बहल
चुवाड़ी जिला चम्बा
Ph 9736296410