कच्चे धागे का बन्धन/राजेश पुरोहित

*कच्चे धागे का बन्धन* बहना ने भाई की कलाई को सजाई है। सजी धजी है बहना, खूब देती बधाई है।। मुस्कराते रहना भाई,देती यही दुहाई है। दुश्मन से लाज बचाना, कहती यही आई है।। ऊँचे अरमानों ने मेरे ,ली कैसी अंगड़ाई है। जब जब राखी आती, फूली नहीं समाई है।। छोटी छोटी कमियाँ भी,भैय्या को … Continue reading कच्चे धागे का बन्धन/राजेश पुरोहित