युवाओं की ऊर्जा को मिले सही दिशा/Ashish Behal

युवाओं की ऊर्जा को मिले सही दिशा

12 जनवरी का दिन हर वर्ष भारत के ओजस्वी युग निर्माता सन्त स्वामी विवेकानंद जी की याद में “राष्ट्रीय युवा दिवस” के रूप में मनाया जाता है। स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन पर मनाए जाने वाले इस दिन का मुख्य उद्देश्य युवाओं में चेतना, देशप्रेम और नवऊर्जा का संचार करना है। भारत एक युवा राष्ट्र है। यंहा के युवाओं में इतनी शक्ति है कि वो किसी भी राष्ट्र की विकास गाथा लिख सकते हैं।


यदि हिमाचल प्रदेश की बात करें तो हाल ही में हिमाचल में युवा सरकार सत्ता में आई है। इसलिए युवाओं में उम्मीद की नई किरण खिली हैं। हाल ही में हिमाचल के नवनिर्मित मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर जी ने युवा 2018 सरकारी दस्तावेजों पत्रिका का विमोचन किया गया। आर्थिकी एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा जारी किये गए दस्तावेज में ये आंकड़े सामने आए हैं कि हिमाचल प्रदेश में युवाओं का औसत अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर है। हिमाचल में कुल जनसंख्या का 35.25 फीसदी युवा नागरिक है जबकि भारत मे ये औसत 34.80 फीसदी है। इससे भी बड़ी और अच्छी बात ये है कि हिमाचल प्रदेश में 95 फीसदी युवा शक्ति पढ़ी लिखी है। इससे बेहतर बात किसी भी राज्य के लिए ओर नही हो सकती। अब यही सही समय है जब युवा ताकत को सही दिशा दी जा सकती है । युवाओं के पास जोश और काम करने का जज्बा होता है। ऐसा देखा गया है कि युवा वर्ग ने जिस भी क्षेत्र में पांव जमाये हैं वँहा विकास ही हुआ है चाहे वो शिक्षा के क्षेत्र में युवा अध्यापकों का आगमन हो या स्वास्थ्य के क्षेत्र में नए चिकित्सकों का या अन्य भी किऐ भी क्षेत्र में बात करें तो युवाओं बे बेहतर परिणाम सामने रखे हैं। अब समय ऐसा आ गया है कि अनुभव और जोश का मिलान करके किसी भी राज्य या राष्ट्र की उन्नति की दिशा तय करके दशा बदली जा सकती हैं। परन्तु अभी भी हिमाचल ने अपनी युवा ताकत का पूरी तरह से दोहन नही किया है। आज युवाओं की अपनी जरूरते हैं समय के साथ साथ अब युवाओं की जरूरतें भी बदल रही हैं। सबसे जरूरी जो युवाओं के लिए है वो है रोजगार। जी हाँ, आज बेरोजगारी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है जिससे युवा ताकत पथ भ्रष्ट हो रही है। युवा वर्ग में आजकल नशे की प्रवृति भी बढ़ती जा रही है जिसका कारण कंही न कंही बढ़ती बेरोजगारी की समस्या को ही माना जा रहा है। युवाओं के लिए रोजगार का सृजन नई सरकार के लिए एक बड़ी चुनोती होगा। चूंकि हिमाचल में सरकारी नोकरी के प्रति लोगों का रुझान हमेशा ही अधिक रहा है जिसका कारण है यंहा व्यवसायिक सोच का न पनपना। आज युवा 12 वी तक कि शिक्षा तो हिमाचल में हासिल करता है परन्तु उच्च प्रोफेशनल शिक्षा के लिए बाहरी राज्यों का रुख करता है। यही कारण है कि वो हिमाचल के बाहर ही अपनी नोकरी भी करता है। क्योंकि हिमाचल में औद्योगिक कम्पनी आदि की कमी है। आज युवा वर्ग व्यवसाय के स्थान पर नोकरी की अधिक तरजीह देता है। एक सर्वेक्षण के अनुसार उत्तर भारत मे हिमाचल बढ़ती बेरोजगारों की संख्या में शुमार हो रहा है। क्योंकि यंहा साक्षरता अधिक है और युवाओं को अपनी प्रतिभा के अनुसार रोजगार नही मिल पाता और बेरोजगारी पनपती है जिसके कारण हम आज भी अपनी युवा शक्ति को सही दिशा नही दे पा रहे। इसके लिए आवश्यक है कि युवाओं में अन्य क्षेत्रों के प्रति जागरूक किया जाए। उनमे स्वरोजगार की भावना निर्मित हो। आज स्कूली स्तर पर तकनीकी शिक्षा देकर युवाओं में कौशल विकास किया जा रहा है। ऐसे युवाओं को स्वरोजगार अपनाने के लिए सरकार मदद करे ये बहुत आवश्यक है। ताकि कोई भी युवा अपना व्यवसाय शुरू करके स्वरोजगार सृजन कर सके।

साथ ही युवाओं में खेलों के प्रति भी रुचि हो ये भी हिमाचल के लिए बेहतर है। इसके लिए युवाओं को स्कूली स्तर से ही खेलों के लिए प्रशिक्षण देना प्रारम्भ हो। हिमाचल में प्रतिभा की कोई कमी नही बस आवश्यकता है तो उसे तराशने की। हिमाचल के युवाओं में ताकत, जज्बा और होंसला सब कुछ है। युवाओं को सही दिशा मिले तो वो हिमाचल के साथ साथ भारत का नाम भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल में चमका सकते हैं। युवाओं के लिए खेल के क्षेत्र भी हमेशा खुले रहने चाहिए। स्वामी विवेकानंद जी भी युवाओं को खेलों में भागीदार बनाने के पक्ष में थे इसलिए उन्होंने कहा था कि
You Will Be Nearer To Heaven Through Football Than Through The Study Of The Gita"
यानि उनका मानना था कि स्वर्ग तक पँहुचने के लिए गीता को पढ़ने से ज्यादा अच्छा है तुम फुटबाल खेलो
उनका भी यही विश्वास था कि युवाओं की शक्ति को उनके जोश को किसी कठोर कार्य के लिए प्रयोग किया जाए।
आज के इस प्रतिस्पर्धा के दौर में हर कोई आगे बढ़ने को लालायित है और जी जान से मेहनत कर रहा है। आज का जमाना तकनीक का है आज के इस मशीनी युग मे भी प्रतिभा की कोई कमी नही आई है बल्कि प्रतिभाएं ओर निखर कर सामने आ रही है। इसलिए ये आवश्यक है कि युवाओं की ताकत को संजोया जाए उन्हें प्रतिभा को साबित करने के मौका मिले। ताकि युवाओं की समझ और उनकी बुद्धिमता को विकास के लिए प्रयोग किया जा सके। आधुनिकता के इस दौर में हम युवाओं की ताकत को दरकिनार कभी भी नही कर सकते। और जिस राज्य के पास सबसे अधिक पढ़े लिखे युवाओं की आबादी हो वो राज्य सिर्फ उस ऊर्जा का सही दोहन कर ले तो प्रगति की राह पर खुद व खुद अग्रसर होगा। आइये इस नए दौर में, नए जोश के साथ आज की युवा शक्ति को उनके सही हक दिलवाएं उनकी ऊर्जा को ओर जोश को यूँ व्यर्थ न जाने दें। आओ युवाओं के हिमाचल को युवा हिमाचल बनाएं। स्वामी विवेकानंद जी के उस एक विचार को हर युवा को धारण करने की आवश्यकता है उन्होंने कहा था कि
उठो , जागो ओर तब तक संघर्ष करो जब तक कि मंजिल की हासिल नही कर लेते।”


हर युवा के लिए आवश्यक है कि इस बात को अपने मन मे बसाए। आजकल ये देखा जाता है कि युवाओं मव प्रतिभा भी है , जोश भी है, ललक भी है परन्तु धैर्य नही है और वो अंतिम समय तक मेहनत नही करता और नाकाम रहता है। तो आइए आज स्वामी विवेकानंद जी के जन्मदिन पर ये प्रण लें कि युवा ताकत को राज्य और राष्ट्र के विकास के लिए लगाएंगे ओर तब तक हार नही मानेंगे जब तक लक्ष्य प्राप्ति नही हो जाती।
जय हिंद

आशीष बहल

Jbt अध्यापक
चुवाड़ी जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश।
ishunv0287@gmail.com

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