माँ काली का पहलवानी रूप है पोहलानी माता/Ashish Behal

पोहलानी माता आस्था का प्रतीक
नवरात्रों का हमारे  धर्म व संस्कृति मे विशेष स्थान है। नवरात्रों के दिनों में लोगो मे भक्ति और श्रद्धा का एक अटूट बन्धन देखने को मिलता है। साल में 2 बार नवरात्रो का त्योहार मनाया जाता है। एक चैत्र नवरात्र जो कि मार्च अप्रैल में होते हैं और दूसरे शरद नवरात्र हो सितम्बर अक्टूबर में आते हैं। आज भारत का खजाना में आपको ले चलते हैं बहुत ही रमणीय स्थल और आस्था के द्वार माता पोहलानी के दर।
जिला चम्बा की खूबसूरत वादियों के बीच स्थित ये मंदिर लाखों भक्तो की आस्था का केंद्र है। माता काली के रूप माता पोहलानी को पहलवानों की देवी कहा जाता है।

राक्षसों से किया मल युद्ध कहलाई पहलवानी माता:
डलहौज़ी में डैनकुंड की खुबसूरत वादियों में बसा पोहलानी माता का ये मंदिर यहाँ के लोगों के लिए श्रधा और आस्था का केंद्र है। पौराणिक कथाओं के अनुसार लोगों पर बढ़ रहे अत्याचार को देखकर माता महाकाली से रहा नहीं गया और वह डैन कुंड की इन्ही पहाड़ियों पर एक बड़े से पत्थर से बाहर प्रकट हुई  पत्थर के फटने की आवाज दूर दूर तक लोगों को सुनाई दी कन्या रूपी माता की हाथ में त्रिशूल था और यंही पर माता ने राक्षसों से एक पहलवान की तरह लड़ कर उनका वध किया तभी से यहाँ पर माता को पहलवानी माता के नाम से पुकारा जाने लगा।
होवार के एक किसान को माता ने सपने में आकर कहा यहाँ पर माता का मंदिर स्थापित करने का आदेश दिया और उनके आदेशानुसार ही यहाँ पर माता के मंदिर की स्थापना की गई.

नवरात्रों में कुछ लोग अपनी मन्नतों को लेकर माता के दरबार में आते है, तो कुछ अपनी मन्नतों के पूरा होने पर माता का धन्यवाद करने के लिए मंदिर में हजारी लगाते है. इन दिनों भी नवरात्रों के चलते यहाँ पर भक्तो की काफी भीड़ देखी जा रही है
पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण:-

यह पर्यटन स्‍थल हिमाचल प्रदेश के जिला चम्‍बा के डलहौजी से 12 km की दूरी पर स्‍थित है यह मंदिर माता काली जी को समर्पित है! जहां से चारों ओर का नजारा दिखाई देता है मंदिर से काफी लोगों की आस्‍था जुडी हुई हैं ! कहा जाता है कि हजारों बर्ष पहले इस डैनकुण्ड की पहाडी के  उस मार्ग से कोई भी नहीं आ जा सकता था क्योंकि इस पहाडीं पर राक्षसों का वास था! माता काली जी ने पहलवान के रुप में आकर उन राक्षसों का संहार किया तब से इस मंदिर का नाम पोहलवानी पडा ।

Pohlani mata temple

यंहा हर साल माता को समर्पित छिंज मेला होता है जिसमे नामी पहलवान अपने दांव खेलते हैं।

रखेड़ गांव है नजदीक:-

पोहलानी माता रखेड़ गांव के वाशिन्दों की कुल माता है इसके नजदीक खूबसूरत रखेड़ गांव पड़ता है जो काहरी पंचायत के अंदर आता है। यंही के लोगो की कमेटी मंदिर की देख रेख करती है।

bharatkakhajana.com/pohlani-mata

फूल वैली है प्रसिद्ध:-
यंहा पर फूल वैली बहुत प्रसिद्ध है। पूरा पहाड़ रंग विरंगे फूलों से ढका रहता है। कुदरत की इस मनमोहक छटा को देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है।

रंग विरंगे फूलों से लदी यह पहाडीं पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है इस पहाडीं से हिमाचल प्रदेश की  नदियों रावी,व्‍यास,चिनाव का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। यहां का शांत वातावरण याञा करने वाले पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है।

यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के उत्तर पश्चिम भाग में 2200 mt की उंचाई पर स्‍थित है!  गमियों जहां पर्यटक यहां की ठण्डी हवाओं का लुप्त उठाते है तो वहीं सर्दी के मौंसम में बर्फ से ढके पहाडों का नजारा देखते ही बनता है।                        
डेनकुण्ड:-
कहते है डेनकुण्ड नामक जगह पर डायने रहती थी यंहा पर आज भी कुंड देखे जा सकते हैं। लोगों का मानना है कि डैन अमावस्या पर यंहा डायने आती हैं।

सर्दियों का नजारा सबसे हसीन:-

सर्दियों में ये मंदिर और इसके आसपास वर्फ़ की मोटी चादर बिछ जाती है जिससे नजारा बहुत ही मनमोहक हो जाता है। दूर दूर तक वर्फ़ ही नज़र आती है उस समय यंहा पंहुचना बहुत कठिन हो जाता है।

माता की मूर्ति पर पसीना ,समझो मनोकामना पूर्ण

कैसे पहुचें माता के मंदिर में :-
  यातायात के मार्ग से पठानकोट से डलहौजी व डलहौजी से डैनकुण्ड से डेढ किलोमीटर की दूरी पर माता का मंदिर है! दूसरी ओर एक और रास्‍ता है जहाँ से भी माता के मंदिर में पहुँचा जा सकता है वो रास्‍ता है पठानकोट-चुवाडी-चम्‍बा मार्ग के जोत नामक स्‍थान से 3 km की पैंदल दूरी तय करने के बाद पोहलवानी माता के मंदिर में पहुँचा जा सकता है । इस पैदल ट्रैक में फूलों से लदी पहाडियां व लम्बें उंचे देवदार के पेड  पर्यटकों का मन मोह लेती है   इन पहाडियों के उपर बाॅलीवुड की गदर फ़िल्म की शुटिग भी इसी पहाडीं के उपर हुई है!

साथ लगते पर्यटन स्थलों में आप खूबसूरत जोत, डलहौजी , चम्बा,चुवाड़ी खज्जियार का मजा ले सकते हैं।

पर्यटकों को यंहा पर प्रकृति का भरपूर नजारा देखने को मिलेगा।

इस रिपोर्ट में प्रेषित की गई फ़ोटो रखेड़ के श्री बृज लाल चोभियाल जो कि मंदिर कमेटी के सदस्य हैं उनकी फ़ेसबुक वाल से ली गयी हैं।



लेखक
आशीष बहल

Ashish Behal
Writer

चुवाड़ी जिला चम्बा
Ph 9736296410
जय माता दी अगर जानकारी अच्छी लगे तो अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें तथा शेयर करें।
जय पोहलानी माता।

ताजा हिमपात दिनांक 12/12/2017

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9 comments

  1. आपने बहुत अच्छा लिखा है श्री मान संपादक महोदय जी !! जय माँ पहलवानी काली की !!

  2. Nice mahakali ke darwar ka manmoh lene wala darwar meri sabse badi sradha mahakali mata main hai or Yeh mata hamare yaha ke logo ke rom rom main basi h

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  5. जय माता पोहलानी तेरी कृपा सब पर बनी रहे।
    बहुत सुन्दर लेख…जानकारी और फोटो सहित
    बधाई आशीष जी।

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