देशभक्ति की कविताएं


शहीदों को सलाम
आतंक का देखो कैसा ये कोहराम मचा है,कभी पठानकोट तो कभी उड़ी की साजिश को रचा है।
कई शहिदों ने शहादत का जाम पिया
शहीद जगदीश ने भी ऊँचा भारत का नाम किया,
शहीद हुए देश की खातिर,सीने पर गोली खाई थी,
आओ झुक कर करें सलाम इन्हें क्योंकि भारत माँ की लाज बचाई थी ।
लुट गयी माँ औ की कोख,कंही सिन्दूर ही उजड़ गया
गिली थी हाथो की मेंहदी अभी, कंही बजी अभी शहनाई थी, शहीदों ने भारत माँ की लाज बचाई थी ।
भय नहीं हमे पाक के नापाक इरादों का,
डर है तो घर में बैठे जयचन्दों की बेवफाई का।
बहुत हुआ अब आतंक का तांडव,कुछ नया इतिहास रचना होगा,
जाग देश के नोजवान अब लाहोर में तिरंगा फहराना होगा।
कर सर्जिकल स्ट्राइक चूहों को घर में ही दफनाना होगा,
चीर के सीना सिंधु का इस्लामाबाद को हिंदुस्तान बनाना होगा,
शहीदों की शहादत को तब सलाम हमारा होगा,
कराची में बैठा जब हिंदुस्तान का नवाब होगा,
एक और जमीं होगी एक और आसमान होगा बीच में महकता मेरा ये हिंदुस्तान होगा।
आशीष बहल चुवाड़ी जिला चम्बा हि प्र
फोन 9736296410

सैनिक की पुकार

सुनो सैनिक की वीरता सुनाने आया हूँ, दर्द की मैं इक गाथा कहने आया हूँ। लहू से लथपथ एक सैनिक जब भारत माता को पुकारे वो करुणा बतलाने आया हूँ वीर सैनिक कहता है……
माँ, माँ दर्द से बेहाल मैं बेजान सा हुआ जाता हूँ भर ले अपने आँचल में, मैं लड़खड़ा सा जाता हूँ। चीर कर देह मेरी, दुश्मन ने हैवानियत का वो खेल खेला है क्या बताऊँ माँ,
बन हिमालय सरहद पर हर घाव मैंने झेला है, हिमाकत दुश्मन की जो मुझे ललकारा है, मैंने घर में घुस कर उसको मारा है। हे माँ मैंने दिन रात अपने लहू से तुझे संवारा है,
थका नहीं,हारा नहीं हर पल गुणगान माँ भारती का गाया है, कमाए होंगे किसी ने नोट ,वोट। मैंने तो भारत माँ के आगे ही शीश झुकाया है,
ले ले छांव में अपनी, अपने आँचल में मुझको छिपा लेना, टूटती इस देह को अपनी ममता से भर देना, बन सैनिक हर बार मैं कुर्बान माँ तुझ पर हो जाऊं, बस रोते बिलखते माँ- बाप को तू संभाल लेना।
खड़ी जो हो मेरे इंतजार में प्राण प्यारी चुपके से उसके कान में नाम मेरा ले आना। ढूंढती बहन की आँखों में मेरी तस्वीर छोड़ आना। फौलाद से मेरे भाई के कंधों को तुम साहला आना। पूछे जो कोई पता मेरा प्यारा सा तिरंगा लहरा आना।
बस फरियाद सैनिक की हर भारतवासी सुन लेना
माँ के दामन को दागदार न होने देना,
कहता है ‘आशीष’ वास्ता सैनिक का खुदगर्ज दुनिया में कभी भारत माँ को न बेच देना, खुदगर्ज दुनिया में कभी भारत माँ को न बेच देना।
आशीष बहल चुवाड़ी जिला चम्बा
Jbt अध्यापक
Ph 9736296410

ना’पाक’  पाकिस्तान
पाक की नापाक हरकतें आखिर कब तक संहेंगे, देश दहक रहा है इंतकाम की आग में कब ये समझेंगे।
बहुत हुआ, सरहद पर अब इक दांव हमारा हो, संभल जा ऐ देश के दुश्मन ऐसा न हो कि लाहौर में लहराता तिरंगा प्यारा हो।

क्या मिलेगा तुझे कश्मीर कश्मीर करते जरा पलट कर देख इतिहास ऐसा न हो कि अबकी बार इस्लामावाद भी हमारा हो।
हे पाकिस्तान, सम्भल जा अभी वक्त हम देते हैं वरना याद रख हिसाब हम सूत समेत लेते हैं।
कर ले ऐ दुश्मन सितम्भ तू, तेरी इंतिहा हम देखेंगे, मर मिटेंगे जो जवान देश पर ऐसे शेर भारत में ही मिलेंगे।
वतन की आवरू को हम यूँ मिटटी में न मिलने देंगे,शहीदों के कतरे कतरे का हिसाब हम लेंगे।
इक दिन फैसला उनके और हमारे दरम्याँ होगा न कोई आतंकी न कोई पाकिस्तान होगा, तभी तो बुलन्दी पर अपना हिंदुस्तान होगा, इक और जमीन इक और आसमां होगा बीच में महकता अपना ये हिन्दुस्तां होगा।
आशीष बहल चुवाड़ी

इक दिया शहीदों के नाम जलाते हैं

खुद को वतन पर कुर्बान करते हैं हर दम हँसते और मुस्कुराते वतन के काम आते हैं इसलिए वतन की आवरु,वतन की शान कहलाते हैं ,तिरंगे में लिपटे भी हर दम ख़ुशी का गान गाते हैं आओ इस दिवाली इक दिया उन शहीदों के नाम जलाते हैं।

कट जाये जो सर उनके उफ़ न जो मुह से करते हैं, वतन की सरहद पर वो अपना जीवन अर्पण करते हैं, बन हिमालय रक्षा वो हर दम हिंदुस्तान की करते हैं, वतन की खातिर वो जीते और मरते है, हर पल खड़े सरहद पर दुश्मन का नामों निशान मिटाते हैं, आओ इस दिवाली एक दिया उन वीर योद्धाओं के नाम जलाते हैं।

आशीष बहल