Poem by Naveen Sharma

166/18:07:2017 काली रात घनेरी भगवन। अद्भुत् छठा बिखेरी भगवन।। मन-मंदिर में घंटा बाजे। है मिलने की देरी भगवन।। उलझी उलझन

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गुड़िया / रविन्द्र अत्रि

#कोटखाई_की_दिवंगत_गुड़िया_को_समर्पित #गुड़िया_हम_शर्मिंदा_हैं_तेरे_कातिल_अभी_जिंदा_हैं। बता गुड़िया तूने देवभूमि में जन्म लिया था। शायद पिछले जन्म, अच्छा कर्म किया था।। 5 साल पालपोस

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