चुवाड़ी का नाग भँडोर जातर मेला ऐतिहासिक धरोहर

आज आपको आस्था के इस अंक में दर्शन करवाते हैं नाग भँडोर देवता जी के। नाग भँडोर मंदिर जिला चम्बा के चुवाड़ी में कुठेड़ गांव में है। इस मंदिर की सबसे खास बात ये है कि कोई भी मुराद ऐसी नही जो इस मंदिर में पूरी न हो जो भी सच्चे मन से नाग मंदिर में माथा टेकता है वो अपनी मनचाही इच्छा को पूर्ण करता है। ये लेख नाग देवता के आशीर्वाद ओर आदेश से ही लिखा जा रहा है।

Naag devta ki prachin pratima


चुवाड़ी वासी का देवता:-
चुवाड़ी शहर में कोई ऐसा परिवार नही होगा जो नाग देवता को न मानता हो हर धर्म , सम्प्रदाय के आराध्य हैं नाग देवता। चुवाड़ी में किसी भी परिवार में शुभ कार्य हो तो प्रथम निमन्त्रण नाग देवता के दर पर दिया जाता है ओर उन्हें सब देख रेख के जिम्मेदारी दे कर लोग निश्चिंत हो जाते हैं।
लोगों की आस्था ही है कि यंहा पर कभी भी किसी के घर किसी कार्यक्रम में वर्षा आदि बाधा नही डालती।


मंदिर का इतिहास:-
मंदिर कई सदियों पुराना बताया जाता है। प्राचीन राजाओं के समय से ये मंदिर आस्था का केंद्र है। यंहा पर रखी प्राचीन मूर्तियां इसके गौरवमयी इतिहास का वर्णन करती हैं।

गुर यानी चेले करते हैं भविष्यवाणी:-

यंहा पर इस समय नाग मंदिर के जातर मेले चले हैं और ये मेले हर वर्ष श्राद्ध पक्ष से 8 दिन पहले राधा अष्टमी को शुरू होते हैं। 8 दिन रोज शाम को मंदिर के गुर नाचते हैं और लोगो को सुखी जीवन का आशीर्वाद देते हैं। नाग के गुर अपने पवित्र परिधान से सुसज्जित होकर ओर घुंगरू पहन कर नाचते हैं जिसे देख कर हर कोई श्रद्धा से नाग देवता के आगे नतमस्तक होता है। भक्त दूर दूर से यंहा दर्शन करने आते हैं और चेलो का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यंहा पर लोग अपनी मनोकामना पूर्ण होने के बाद नाग भगवान को चांदी और सोने के छत्र चढ़ाते हैं।
रमणीय स्थल:-

ये स्थान बहुत ही ख़ूबसूरत शहर चुवाड़ी के मस्तक पर विराजमान है। आसपास का वातावरण बहुत ही रमणीय है। मंदिर प्राचीन समतल छत नुमा है। ये मंदिर चुवाड़ी शहर से 2 km दूर है।

Chowari


सांच पूज का प्रसाद:- नाग देवता को आटे से बने थोरु या बबरु का भोग लगता है। साथ ही लोग अपनी फसल का कुछ हिस्सा भी यंहा प्रसाद बना कर लगाते हैं।

कुछ प्रचलित कथाएं:-
कहा जाता है कि पहले नाग के गुर नाग रूप में पूरे इलाके की प्रक्रिमा करते थे जिसे फेरी कहा जाता था। नाग भँडोर के गुर को उस रात बजंतरियों(बेंसियो) की टोली पूरी रात राग लगा कर नाग को भेजते थे और बुलाते भी थे। जब नाग चलने लगते तो उन्हें एक राक्षस रोकता जिसे “वाण” कहा जाता है फिर नाग उन्हें वापिस आकर झोटे की बलि का वायदा करते और आगे बढ़ते। कहा जाता है कि बेंसी अपने कंधे पर जों और सरसों के दाने रख कर राग लगाते थे और जब वो सरसो खत्म हो जाती तो वापसी का राग लगा देते परन्तु एक बार राग बजाने वालो ने न जाने जानबूझ कर या भूल वश राग को बदला नही ओर नाग के गुर वापिस नही आए आगे ही चलते रहे कहते हैं कि फिर वो चलते चलते चम्बा के शीतला माता के मंदिर के पास पँहुच गए तो वँहा से शीतला माता ने नाग को वापिस भेजा बाद में जब सुबह नाग वापिस आये तो बहुत क्रोधित थे और उन्होंने उन बजंतरियों को श्राप दे दिया कि आपके कुल का नाश हो जाएगा ओर वैसा ही हुआ आज नाग भँडोर के अपने बजंत्री खत्म हो चुके हैं और इसलिए नाग बिंतरु के बजंत्री(बेंसी) ही यंहा 8 दिन तक वाद्य यंत्र बजाते हैं।

राजकाल के हैं सारे सेवकार:- यंहा पर मन्दिर के पुजारी ,बेंसी,चेले सब राजकाल के ही नियुक्त किये हैं। इन्ही के वंशज नाग देवता की सेवा कर रहे हैं। आज भी फसल निकलने पर उस समय से राजा के आदेश से लोग इन सेवाकारो को फसल का हिस्सा देते हैं।
पीढ़ियों से गुर कर रहे सेवा:- यंहा नाग भँडोर ओर नाग बिंतरु के गुर यानी चेले कई पीढ़ियों से नाग देवता की पूजा कर रहे हैं। पहले कई पीढियां नाग देवता के यंहा खेलती थी और अब आगे उनके बच्चे नाग के चेले हैं।

झोटे की बलि:- कुछ साल पहले यंहा झोटे की बलि देने की परंपरा भी थी परंतु समय के साथ इस प्रथा को बंद कर दिया गया है। शुरू में तो लोगो मे इस प्रथा को बंद करने पर लोगो मे रोष था उन्हें डर था कि कंही नाग देवता नाराज न हो जाएं पर नाग के चेलों ने इस प्रथा को बंद करने में हामी भरी ओर अब यंहा कोई बलि नही दी जाती।
पांच नाग भाई हैं:-
भट्टियात में 5 नाग भाई हैं :-
1.नाग बिंतरु महाराज जो कि चुवाड़ी से दूर एक ऊंची पहाड़ी पेरू पर्वत पर विराजमान है। ये भी एक बहुत खूबसूरत स्थान है जो अधिकतर वर्फ़ से घिरा रहता है। नाग बिंतरु महाराज का छोटा मंदिर चुवाड़ी शहर में है जंहा लोग पूजा पाठ करते हैं।

2.नाग सुंडल महाराज:- नाग सुंडल महाराज जोत की पहाड़ी पर विराजमान है जो कि लाखों भक्तो की आस्था का केंद्र है यंहा लोग छोटे छोटे हल बना कर चढ़ाते है ताकि नाग देवता उनके पशुओँ की रक्षा करें ये नाग देवता सुन नही सकते इसलिए इन्हें टोनू नाग भी कहा जाता है।
3.खज्जी नाग:-खज्जी नाग के नाम पर ही मिनी स्विट्जरलैंड खज्जियार को जाना जाता है। ये स्थान दुनिया की सबसे खूबसूरत जगहों में गिना जाता है।
4.छत्रार नाग:- ये नाग देवता का मन्दिर समोट के नजदीक है।
5. नाग भँडोर

तीसरे दिन मिलते है नाग बिंतरु महाराज:-

ऊंचे पर्वत पर वास करने वाले नाग बिंतरु महाराज इन 7 दिन चलने वाले जातर मेले में तीसरे दिन नाग भँडोर मंदिर में अपने सारे साजो सामान के साथ आते हैं और उस दिन दोनों नाग के गुर एक दूसरे से बहुत मिलते हैं जैसे भाई भाई एक दूसरे को देख कर खुश होते हैं ये भी एक बहुत ही खास पल होता है। और हजारों लोग इसके गवाह बनते हैं।

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत:-
ये मेला जिला चम्बा की एक ऐतिहासिक धरोहर भी है । यंहा पर बजने वाले वाद्य यंत्र काफी प्राचीन कला का एक जीत जागता उदाहरण है। ढोल नगाड़ों के साथ साथ मधुर बांसुरी की आवाज भी वातावरण को संगीतमय बना देती है। कोई भी यंहा आकर इस खूबसूरत और हृदय को प्रफुलित कर देने वाले मोहोल में खो जाता है।
हस्तकला का नमूना झूला:-

Lakadi ka jhula

यंहा प्राचीन हस्तकला का एक नायाब नमूना यंहा का झूला भी आकर्षण का केंद्र रहता है। ये झूला लकड़ी का होता है और आज के आधुनिक झूलो से बहुत छोटा होता है।

हिडिम्बा माता मंदिर:- नाग मंदिर के पीछे माता हिडिम्बा का भी मंदिर है वो भी इतना ही प्राचीन है जितना नाग मंदिर।

बड़ी जातर:- वैसे तो 8 दिन यंहा जातर मेले चलते हैं पर अंतिम दिन नजारा बहुत ही सुंदर होता है। मेले में हजारों भक्त आसपास के इलाके से यंहा आते हैं और अलग अलग गांव के लोग अपने साथ ढोल बाजे लेकर पूरे गांव के साथ चलते हैं। पहले हर गांव को एक एक साल झोटे को बलि करने का आदेश होता था पर अब बिना झोटे के साथ ही लोग अपने अपने गांव से आते हैं।

जरूर आएं नाग भँडोर के दर:- आप भी यंहा आकर इस रमणीय स्थल का आनंद ले सकते हैं यंहा पर आकर मन को शांति मिलती है और मन की मुरादें भी पूरी होती हैं।
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लेखक

आशीष बहल


आशीष बहल
Jbt अध्यापक
चुवाड़ी जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
Ph 9736296410