जानिए कब और कैसे करे महाशिवरात्रि ब्रत

कैसे और कब रखें इसबार महाशिवरात्रि का ब्रत

महाशिवरात्रि का हमारे हिन्दू धर्म मे एक विशेष स्थान है। शिव भगवान पूरे हिंदुस्तान में आराध्य देव देवों के देव माने जाते हैं। शिवरात्रि का पर्व सभी लोग मिलजुल काट मनाते हैं ओर भोले बाबा का गुणगान करते हैं। सबसे पहले जानते हैं इस ब्रत का महत्व कहते हैं कि इस दिन को शिव और पार्वती के विवाह के रूप में मनाया जाता है। शिव और पार्वती को भगवान की सबसे आदर्श दाम्पत्य के रूप में माना और पूजा जाता है। इसलिए शिव के अधिकतर मंदिर शिव और पार्वती के ही होते हैं। इसलिए ये ब्रत सभी दाम्पत्य जीवन के लिए फलदायी है। शिव हर भक्त की मनोकामना पूर्ण करते हैं। इस बार शिवरात्रि के ब्रत को लेकर बहुत असमंजस है

तो आइए जानते हैं 2018 में कैसे और कब रखें ये ब्रत

इस बार महाशिवरात्रि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
इसकी वजह यह है कि महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को होती है। इस साल 13 फरवरी को पूरे दिन त्रयोदशी है और मध्यरात्रि में 10 बजकर 35 मिनट से चतुर्दशी शुरू होगी.

जबकि 14 फरवरी को पूरे दिन और रात 12 बजकर 47 मिनट तक चतुर्दशी होगा। ऐसे में लोगों के बीच असमंजस है कि महाशिवरात्रि का व्रत 13 फरवरी को रखा जाए या 14 फरवरी को।
इस असमंजस को दूर करने के लिए  धर्मसिंधु नामक ग्रंथ का सहारा लिया, जिसमें कहा गया है कि ऐसे हालात के लिए कहा गया है :
_’परेद्युर्निशीथैकदेश-व्याप्तौ पूर्वेद्युः सम्पूर्णतद्व्याप्तौ पूर्वैव..’

इन पंक्तियों का अर्थ समझें तो कहा गया है कि : अगर चतुर्दशी दूसरे दिन निशीथ काल में कुछ समय के लिए हो और पहले दिन संपूर्ण भाग में हो तो पहले दिन ही महाशिवरात्रि का व्रत करना चाहिए.

यानी इस बार 13 फरवरी को महाशिवरात्रि का व्रत रखें।

ॐ नमः शिवाय

वर्ष 2018 में फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि 13 फरवरी को रात दस बजकर 34 मिनट को शुरू होगी, जो 14 फरवरी को रात 12.14 बजे के करीब तक रहेगी।

शिवरात्रि पूजन विधि

भगवान शिव की पूजा-वंदना करने के लिए प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि (मासिक शिवरात्रि) को व्रत रखा जाता है, लेकिन सबसे बड़ी शिवरात्रि फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी को होती है। इसे महाशिवरात्रि भी कहा जाता है। वर्ष 2018 में महाशिवरात्रि का व्रत 13 फरवरी को रखा जाएगा। गरुड़ पुराण के अनुसार शिवरात्रि से एक दिन पूर्व त्रयोदशी तिथि में शिव जी की पूजा करनी चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके उपरांत चतुर्दशी तिथि को निराहार रहना चाहिए।

महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को जल चढ़ाने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग को पंचामृत से स्नान कराकर ‘ऊं नमो शिवाय’ मंत्र से पूजा करनी चाहिए। इसके बाद रात्रि के चारों प्रहर में शिवजी की पूजा करनी चाहिए और अगले दिन प्रातः काल ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करना चाहिए। गरुड़ पुराण के अनुसार इस दिन भगवान शिव को बिल्व पत्र अर्पित करना चाहिए। भगवान शिव को बिल्व पत्र बेहद प्रिय हैं। शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव को रुद्राक्ष, बिल्व पत्र, भांग, शिवलिंग और काशी अतिप्रिय हैं।

ॐ नमः शिवाय का जाप ही इस ब्रत का सबसे बड़ा मन्त्र है। या आप महामृत्युंजय का मंत्र का जाप भी कर सकते हैं।

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अगर आप भी शिवभूमि हिमाचल या किसी अन्य शिव मंदिर की कोई कथा शेयर करना चाहते हैं तो लिख भेजिये ‘भारत का खजाना” साहित्य समूह में इस बार शिवरात्रि पर शिव की महिमा का व्याख्यान किया जाएगा।
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