​किसान के घर से मुख्यमंत्री आवास तक जयराम ठाकुर

आइये जाने हिमाचल कर मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर जी के बारे में

परिंदों को मिलेगी मंजिल ये फैले हुए उनके पंख बोलते हैं

खामोश रहते हैं अक्सर वो लोग जमाने मे जिनके हुनर बोलते हैं”

हिमाचल के नव निर्मित मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर जी भी वही खामोश ओर हुनरमंद इंसान के रूप में अपनी पहचान रखते हैं।
हिमाचल प्रदेश में 6 दिन की चर्चा के बाद लोकतंत्र की जीत हुई और हिमाचल की कमान एक बहुत ही आम, सरल और सादगी पसन्द इंसान के हाथ में देकर भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर लोकतंत्र की परिभाषा को साकार किया। इसके लिए भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व बधाई का पात्र है। आज हम जानेंगे हिमाचल के मुख्यमंत्री के बारे में

जयराम जी का जन्म 6 जनवरी 1965 को मंडी जिला के सिराज विधानसभा क्षेत्र में आने वाले एक छोटे से गांव तांदी ग्राम पंचायत मुराहग में एक बहुत ही मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ।

परिवार

नाम:- जय राम ठाकुर

पिता:- जेठू राम

माता:- ब्रिकु देवी

पत्नी:- डॉ साधना

2 बेटियां 

3 भाई 2 बहनें

शिक्षा:- जयराम जी ने प्राइमरी तक कि पढ़ाई गांव की पाठशाला में ही की बी ए की पढ़ाई मंडी में ओर एम ए की पढ़ाई पंजाब में पूरी की।

साधारण परिवार से सम्बद्ध:- 

जयराम जी बहुत ही साधारण किसान परिवार से सम्बद्ध रखते हैं। ऐसे परिवार के लोगों का जीवन रोजी रोटी कमाने में बीत जाता है ऐसे परिवार से कोई व्यक्ति राजनीति में आने के बारे में सोच भी नही सकता। वँहा से निकल कर जयराम जी ने ये मुकाम हासिल किया है जो अपने आप में एक मिसाल है। पिता खेती का काम करते और मिस्त्री का। परिवार वालो की इच्छा थी कि जयराम जी भी खेतीबाड़ी सम्भाले।

राजनीतिक जीवन:- राजनीति की राह जयराम जी के लिए कोई आसान नही थी पर वही बात है ना 

जब इरादे आसमान छूने को हो तो

बादलों से घबराते नही

जयराम जी कॉलेज की पढ़ाई करते हुए ही ABVP के साथ जुड़ गए और बस वंही से उनके रास्ते उन्हें राजनीति में ले गए। और उन्होंने पीछे मुड़कर नही देखा। आरएसएस के सम्पर्क में आये और abvp के प्रचार प्रसार का काम इनके जिम्मे आया। जम्मू कश्मीर में ABVP के प्रचार की जिम्मेदारी इन्हें सौंपी गई। 1993 में इन्हें हिमाचल से सिराज विधानसभा का टिकेट महज 28 साल की उम्र में दिया गया। पहली बार तो ये जीत नही सके पर उसके बाद कभी उन्होंने हार का मुँह नही देखा। 

परिवार को पसंद नही था राजनीति में जाना:– जयराम जी के परिवार को राजनीति में जाना पसंद नही था। उनके बड़े भाइयों ने उन्हें इस और न जाने की बात कही क्योंकि परिवार की आर्थिक स्थिति इसकी इजाजत नही देती थी। परन्तु इसके बावजूद जयराम जी ने आज उस मुकाम को हासिल किया जो बहुत से लोगों के लिए सपना ही रहता है।
कई महत्वपूर्ण पद:– जयराम जी को राजनीति का काफी लंबा अनुभव है। सिराज में मंडल अध्यक्ष रहने के बाद वो बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्य कर चुके हैं और राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। आरएसएस के नेताओ से अच्छे सम्बद्ध होने के साथ साथ प्रदेश के अन्य नेताओं और केंद्र में भी अच्छी पकड़ है।

सादगी की मिसाल:– जयराम जी बहुत ही मृदुभाषी और सादगी की मिसाल हैं। जयराम जी ने ये मुकाम बहुत ही मेहनत से पाया है। उन्हें राजनीति विरासत में नही मिली उन्होंने इसे हासिल किया है। उनके इस पद तक पँहुचने के लिए एक बात कहनी पड़ेगी

हैरान हैं वो मुझे ऊंचाइयों पर देखकर

पर किसी ने मेरे पैरों के छाले नही देखे”

जो पांव धूप में जलकर पके हैं और जो राजनीति उन्होंने की है उससे साफ जाहिर होता है कि उन्होंने लोगों के दिलो में जगह बनाई है इसलिए 1998 के बाद सरकारे बदलती रही पर सिराज विधानसभा का विधायक नही बदला क्योंकि जयराम जी ने लोगों के दिल मे अपनी छाप छोड़ी है। 

कौन कहता है आसमान में छेद नही होता

एक पत्थर तो तबीयत से उछालो मेरे यारो”

अब जो सादगी और कार्यकुशलता उन्होने विधायक और मंत्री के तौर पर बताई है अब हिमाचल की जनता के दिल मे भी वही छाप छोड़ने की आवश्यकता है। और हमे पूर्ण विश्वास है कि वो इसमे खरे उतरेंगे। हिमाचल की जनता की ओर से हार्दिक बधाई।

जय हिंद जय हिमाचल
लेखक

आशीष बहल

चुवाड़ी जिला चम्बा

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