कला की नगरी चम्बा/सामान्य ज्ञान

कला की नगरी चम्बा
ऑनलाइन पत्रिका भारत का खजाना आपको हिमाचल के विभिन्न जिलों की सैर करवाएंगे। हिमाचल के 12 जिले हैं ।आज हम जानेंगे हिमाचल के चम्बा जिले के बारे में। कई प्रकार के एग्जाम आदि में आपको मदद मिलेगी। चम्बा को कला की नगरी कहा जाता है यंहा की सांस्कृतिक विरासत इसकी जिले की पहचान है।

हिमाचल प्रदेश का चंबा अपने रमणीय मंदिरो और हस्तकला के लिए विश्व विख्यात है। रावी नदी के किनारे 996 मीटर की ऊंचाई पर स्थित चंबा पहाड़ी राजाओं की प्राचीन राजधानी थी। चंबा को राजा साहिल वर्मन ने 920 ई. में स्थापित किया था। इस नगर का नाम उन्होंने अपनी प्रिय पुत्री चंपावती के नाम पर रखा। चारों ओर से ऊंची पहाड़ियों से घिरे चंबा ने प्राचीन संस्कृति और विरासत को संजो कर रखा है। प्राचीन काल की अनेक निशानियां चंबा में देखी जा सकती हैं।
क्षेत्रफल की दृष्टि से चम्बा हिमाचल का दूसरा सबसे बड़ा जिला है।
मुख्यालय: चम्बा
ऊंचाई: 1006 मीटर की दूरी पर
बोली जाने वाली भाषाएँ: चम्ब्याली और हिन्दी
पर्वतमाला : धौलाधार,जास्कर ओर पीरपंजाल
चम्बा में मुख्य घाटियाहैं:- भट्टियात घाटी चिनाब घाटी और पांगी-चम्बा-लाहौल घाटी
चम्बा में मुख्यतः दो नदियाँ बहती है – चिनाब और रावी

पर्यटन स्थल:- चम्बा के मुख्य पर्यटन स्थल खज्जियार,जोत, डलहौजी,चुवाड़ी हैं।

जोत की जानकारी पढ़ें यंहा

यंहा के प्रसिद्ध मंदिर:-
चम्बा अपने मंदिरों के लिए बहुत प्रसिद्ध है और लोगो की इन मंदिरों में गहन आस्था है।
चंपावती मंदिर
यह मंदिर राजा साहिल वर्मन की पुत्री को समर्पित है। कहा जाता है कि चंपावती ने अपने पिता को चंबा नगर स्थापित करने के लिए प्रेरित किया था। मंदिर को शिखर शैली में बनाया गया है। मंदिर में पत्थरों पर खूबसूरत नक्काशी की गई है और छत को पहिएनुमा बनाया गया है।

लक्ष्मीनारायण मंदिर:-

Lakshmi Narayan mandir

यह मंदिर पांरपरिक वास्तुकारी और मूर्तिकला का उत्कृष्‍ट उदाहरण है। चंबा के 9 प्रमुख मंदिरों में यह मंदिर सबसे विशाल और प्राचीन है। कहा जाता है कि सवसे पहले यह मन्दिर चम्बा के चौगान में स्थित था परन्तु बाद में इस मन्दिर को राजमहल के साथ स्थापित कर दिया गया। भगवान

विष्णु को समर्पित यह मंदिर राजा साहिल वर्मन ने 10 वीं शताब्दी में बनवाया था। यह मंदिर शिखर शैली में निर्मित है। मंदिर में एक विमान और गर्भगृह है। मंदिर का ढांचा मंडप के समान है। मंदिर की छतरियां और पत्थर की छत इसे बर्फबारी से बचाती है।

ब्रजेश्वरी मातामंदिर
यह प्राचीन मंदिर एक हजार साल पुराना माना जाता है। प्रकाश की देवी ब्रजेश्वरी को समर्पित यह मंदिर नगर के उत्तरी हिस्से में स्थित जनसाली बाजार के अंत में स्थित है। शिखर शैली में निर्मित इस मंदिर का छत लकड़ी से बना है और एक चबूतरे पर स्थित है। मंदिर के शिखर पर बेहतरीन नक्काशी की गई है।

चामुन्डा देवी मंदिर
यह मंदिर पहाड़ की चोटी पर स्थित है जहां से चंबा की स्लेट निर्मित छतों और रावी नदी व उसके आसपास का सुन्दर नजारा देखा जा सकता है। मंदिर एक ऊंचे चबूतरे पर बना हुआ है और देवी दुर्गा को समर्पित है। मंदिर के दरवाजों के ऊपर, स्तम्भों और छत पर खूबसूरत नक्काशी की गई है। मंदिर के पीछे शिव का एक छोटा मंदिर है। मंदिर चंबा से तीन किलोमीटर दूर चंबा-जम्मुहार रोड़ के दायीं ओर है। भारतीय पुरातत्व विभाग मंदिर की देखभाल करता है।
हरीराय मंदिर:-
भगवान विष्णु का यह मंदिर 11 शताब्दी में बना था। कहा जाता है कि यह मंदिर सालबाहन ने बनवाया था। हरीराय मंदिर में चतुमूर्ति आकार में भगवान विष्णु की कांसे की बनी अदभुत मूर्ति स्थापित है। केसरिया रंग का यह मंदिर चंबा के प्राचीनतम मंदिरों में एक है। यह हिमाचल प्रदेश का शिखर शैली में बना बहुत पुराना मंदिर है।

यहां महिसासुरमर्दिनी रूप में दिखाया गया है। मंदिर में स्थापित देवी की पीतल की प्रतिमा राजा मेरू वर्मन के उस्ताद कारीगर मुग्गा ने बनाई थी। यह मंदिर हिमाचल प्रदेश का प्रमुख और पवित्र तीर्थ स्थल है। यहां हर साल मणिमहेश यात्रा का आयोजन होता है।
सुहीमाता मंदिर:-
चंबा के निवासियों के लिए अपना जीवन त्यागने वाली यहां की राजकुमारी सूही को यह मंदिर समर्पित है। यह मंदिर शाह मदार हिल की चोटी पर स्थित है। यहा सूही माता नें कुछ समय के लिए विश्राम किया था। यहाँ सुई माता की याद में यहां हर साल सुई माता का मेला चैत महीने से शुरु होकर बैसाख महीने तक चलता है। यह मेला महिलाओं और बच्चों द्वारा मनाया जाता है। मेले में रानी के गीत गाए जाते हैं और रानी के बलिदान को श्रद्धांजलि‍ देने के लिए लोग सुई मन्दिर से रानी के वलिदान स्थल मलूना तक जाते हैं।
कुछ अन्य रमणीय स्थल:-
भूरी सिंह संग्रहालय:-
यह संग्रहालय 14 सितंबर 1908 ई. को खुला था। 1904-1919 तक यहां शासन करने वाले राजा भूरी सिंह के नाम पर इस संग्रहालय का नाम पड़ा। भूरी सिंह ने अपनी परिवार की पेंटिग्स का संग्रह संग्रहालय को दान कर दिया था। चंबा की सांस्कृतिक विरासत को संजोए इस संग्रहालय में बसहोली और कांगड़ा आर्ट स्कूल की लघु पेंटिग भी रखी गई हैं।
भांदल घाटी:-
यह घाटी वन्य जीव प्रेमियों को काफी लुभाती है। यह खूबसूरत घाटी 6006 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यह घाटी चंबा से 22 किमी .दूर सलूणी से जुड़ी हुई है। यहां से ट्रैकिंग करते हुए जम्मू-कश्मीर पहुंचा जा सकता है।

चम्बा का दिल चौगान:-

यह खुला घास का मैदान है। लगभग 1 किमी. लंबा और 75 मीटर चौड़ा यह मैदान चंबा के बीचों बीच स्थित है। इसे चम्बा का दिल भी कहा जाता है। चौगान में लहलहराता तिरंगा झंडा भी आकर्षण का केंद्र है। चौगान में प्रतिवर्ष मिंजर मेले का आयोजन किया जाता है। एक सप्ताह तक चलने वाले इस मेले में स्थानीय निवासी रंग बिरंगी वेशभूषा में आते हैं।
रामलीला भी इसी चौगान में की जाती है जो काफी प्रसिद्ध है।

रंगमहल:-
यह प्राचीन और विशाल महल सुराड़ा मोहल्ले में स्थित है। महल में अब हिमाचल एम्पोरियम बना दिया गया है। इस महल की नींव राजा उमेद सिंह ने (1748-1768) डाली थी। महल का दक्षिणी हिस्सा राज श्री सिंह ने 1860 में बनवाया था। यह महल मुगल और ब्रिटिश शैली का मिश्रित उदाहरण है। यह महल यहां के शासकों का निवास स्थल था।

अखंड चंडी महल:-
चंबा के शाही परिवारों का यह निवास स्थल राजा उमेद सिंह ने 1748 से 1764 के बीच बनवाया था। महल का पुनरोद्धार राजा शाम सिंह के कार्यकाल में ब्रिटिश इंजीनियरों की मदद से किया गया। 1879 में कैप्टन मार्शल ने महल में दरबार हॉल बनवाया। बाद में राजा भूरी सिंह के कार्यकाल में इसमें जनाना महल जोड़ा गया। महल की बनावट में ब्रिटिश और मुगलों का स्पष्ट प्रभाव देखा जा सकता है। 1958 में शाही परिवारों के उत्तराधिकारियों ने हिमाचल सरकार को यह महल बेच दिया। बाद में यह महल सरकारी कॉलेज और जिला पुस्तकालय के लिए शिक्षा विभाग को सौंप दिया गया।

चम्बा रुमाल:-

चम्बा रुमाल चम्बा की ऐतिहासिक विरासत है और हस्तशिल्प कला का अदभुत नमूना है। चम्बा रुमाल का इतिहास बहुत प्राचीन है और ऐसी कसीदाकारी सिर्फ और सिर्फ चम्बा में ही की जाती है । इस बार 26 जनवरी 2017 की गणतंत्र दिवस की परेड में चम्बा रुमाल की झांकी मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। आप चम्बा रुमाल की विस्तृत जानकारी इस लिंक में पढ़ सकते हैं।

नदियां:-
चिनाब नदी लाहौल के बरलाचा से निकलती है
रावी नदी बड़ा-भंगाल(जिला काँगड़ा) से निकलती है
चंद्रा और भागा नदी तांदी(लाहौल) में मिलकर चिनाब का निर्माण करती है
चम्बा में भेड़ प्रजनन केंद्र सरोल में है
भूरी सिंह संग्रहालय की स्थापना 1908 में की गई

ग्रामीण जनसँख्या : 4,82,653
शहरी जनसँख्या :36,191
कुल जनसँख्या :5,18,844
पुरुष :2,60,848
महिलायें :2,57,996
लिंग अनुपात : 986/1000
जनसँख्या घनत्व : 80

मुख्य धर्म :हिन्दू, मुस्लिम और सिख
बोली जाने वाली भाषा : चम्ब्याली, चुराही, पंग्वाली, भरमौरी, हिंदी,भट्टियात
परम्परागत भोजन :मक्की, चावल, गेंहू
अर्थव्यवस्था : खेतीबाड़ी आधारित, भेड़ बकरी पालन
मणि महेश झील:-

चम्बा का मणि महेश लाखों भक्तो की आस्था का केंद्र है हर साल यंहा पवित्र मणि महेश यात्रा का आयोजन किया जाता है जिसमे देश के कोने कोने से लोग भगवान शिव के दर्शन करने आते हैं। ये पवित्र यात्रा सदियों से चली आ रही है।

लोकगीत व लोकसंस्कृति:-

यंहा के लोकगीत ओर संस्कृति लोगो के दिलो में वसी है। कुंजू चेंचलो, कुंजड़ी मल्हार जैसे लोकगीत यंहा के लोगो द्वारा गाये जाते हैं। यंहा शिवजी भगवान की पूजा में नवाला पूजन होता है जो कि काफी प्रसिद्ध है।

राजा और उनका शासन:-

आदित्य वर्मन, वर्मन वंश के पहले व्यक्ति थे, वो मेरु वर्मन के दादा जी थे| मेरु वर्मन के तीन बेटे थे| सबसे बड़े बेटे ने भरमौर शहर की स्थापना की थी| मेरु बर्मन कु्छ मंदिरों का निर्माण किया था जो इस प्रकार हैं :_ मणिमहेश मंदिर, गणेश मंदिर, नरसिंह मंदिर| मेरुवर्मन ने सूरज मुख मंदिर का भी निर्माण किया था |
मुसान वर्मन ने अपने राज में चूहों के मरने पर पाबन्दी लगा दी थी| चम्बा ज़िले का नाम साहिल बर्मन की बेटी चम्पावती के नाम पर रखा गया था| सूही मेला साहिल वर्मन की पत्नी रानी नैना देवी की याद में मनाया जाता है| युगांकर वर्मन ने गौरी शंकर मंदिर का निर्माण किया था |
चम्बा में पहले यूरोपियन Mr. Vinge1839 में आया था |
भारतीय गवर्नर जनरल लार्ड मायो चम्बा 13 नवम्वर 1871आये थे |
चम्बा के त्यौहार:-
यहाँ पर कुछ त्योहार तो ऐसे हैं, जो केवल चम्बा में ही मनाए जाते हैं, जैसे- मिन्जर का मेला, सूही का मेला इत्यादि। चम्बा का रुमाल, चम्बा की चप्पल, चम्बा की चुख (मिर्ची का आचार) इत्यादि यहाँ की कुछ प्रसिद्ध वस्तुओं में से हैं।
दर्रे,नदियां ओर प्रमुख बातें:-
1.जालसू, साच कुगति, पौन्दरी,बसोदन चम्बा ज़िले के दर्रे हैं |

2.बुढिल और तुन्डाह रावी की सहायक नदियाँ है |
3.चिनाब नदी चम्बा के सेचुनाले से निकलर जम्मू में प्रवेश कराती है|
4.मणिमहेश, गढ़ासरू , खजियार, महाकाली, लामा चम्बा की प्रमुख झीलें हैं।

5.चम्बा की स्थापना मेरु ने की थी |
आदित्य वर्मन ने सर्वप्रथम वर्मन उपाधि धारण की थी| मेरुबर्मन भरमौर का शक्तिशाली राजा था |
6. लक्ष्मी वर्मन के कार्यकाल में ज्यादातर लोग महामारी से मरे थे|
7.भरमौर में 84 मंदिरों का समूह है | जिनका सम्बद्ध चम्पक नाथ से है।
8.यंहा का लोक नृत्य झांझर का नृत्य है। 9.चम्बा में चमेरा 1, चमेरा 2, हडसर, भरमौर जल विद्युत परियोजनायें हैं।
10.चम्बा ज़िले मे सर्वाधिक मुस्लिम निवास करते हैं।
11. चम्बा में सबसे ज्यादा भेड़ बकरियाँ पाई जाती है।

यह जानकारी विभन्न स्त्रोतों इंटरनेट, किताब और लोगों से प्राप्त सूचना के आधार पर लिखी गई है।

धरती का स्वर्ग है जोत/Ashish Behal