एक ग़ज़ल आप सबकी महब्‍बतों के नाम
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हैं आंखें आंसुओं से तर ? नहीं तो!
भिगोना है कोई मंज़र? नहीं तो!

कोई अफ़सोस कोई डर? नहीं तो!
हम अपने आपे से बाहर ? नहीं तो!

कहीं इलज़ाम रुसवा हो न जाये
तुम्हारी पीठ में ख़ंजर? नहीं तो!

ज़बाँ को अक्ल कहना पड़ रहा है
वो कर देंगे मुझे अंदर नहीं तो!

हवेली से यही फ़रमान आया
कहूँ जैसा तू वैसा कर नहीं तो !

जहाँ में आके तुम खुश हो रहे हो
मिले दुख दर्द के लश्‍कर? नहीं तो!

तुम उसको याद करते हो? बजा है
बताओगे उसे मिलकर ? नहीं तो!

-नवनीत शर्मा

लेखक परिचय:-
नवनीत शर्मा

जन्म 22 जुलाई 1973 को मशहूर उर्दू शायर मनोहर शर्मा सागर पालमपुरी के घर।
-प्रारंभिक शिक्षा राजकीय उच्च विद्यालय दैहन से।
-कालेज में चार साल लगातार आल राउंड बेस्ट स्टूडेंट।
-हिमाचल प्रदेश विश्व विद्यालय शिमला से एमबीए।
-कुछ समय निजी कंम्पनी में बिताने के बाद पत्रकारिता में प्रवेश 1997 में।
-आठ साल दिव्य हिमाचल में सेवाएं दी।
-2005 में दैनिक जागरण के साथ मुख्य उप सम्पादक के रूप में जुड़े और अब पिछले छह साल से वरिष्ठ समाचार संपादक हिमाचल प्रदेश हैं।
– एक कविता पुस्तक ‘ढूंढना मुझे’ प्रकाशित। ग़ज़ल संग्रह इसी वर्ष प्रकाशित होने वाला है।
– दूरदर्शन और आकशवाणी से वार्ताएं और साहित्यिक रचनाओं का प्रसारण।
– अब तक सुगंध संगीत दायरा लुधियाना, हिमाचल केसरी धर्मशाला , हिमतरु समिति और ऑथर्स गिल्ड ऑफ हिमाचल प्रदेश से राज्य सम्मान मिल चुके हैं।