हैप्पी बर्थडे जयराम ! जाने कैसे रहा जयराम के जीवन का सफर

लेखक: रविन्द्र कुमार अत्री  जनवरी 06, 2018

हिमाचल के मंडी जिले के सिराज विधानसभा क्षेत्र को प्रकृति ने सुंदरता का अपार भंडार बख्शा है। इसी विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत मुराहग में तांदी गांव है जहां हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का घर है। 6 जनवरी 1965 को जेठू राम और ब्रिकमो देवी के घर जन्मे जयराम ठाकुर का बचपन गरीबी में कटा। परिवार में 3 भाई और 2 बहनें थीं। पिता खेतीबाड़ी और मिस्त्री का काम करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। जयराम ठाकुर तीन भाईयों में सबसे छोटे हैं इसलिए उनकी पढ़ाई-लिखाई में परिवार वालों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। जयराम ठाकुर ने कुराणी स्कूल से प्राइमरी करने के बाद बगस्याड़ स्कूल से उच्च शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद वह मंडी आए और यहां से बीए करने के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी से एमए की पढ़ाई पूरी की।

परिवार ने खेतीबाड़ी संभालने की सलाह दी
जयराम ठाकुर को पढ़ा चुके अध्यापक लालू राम बताते हैं कि जयराम ठाकुर बचपन से ही पढ़ाई में काफी तेज थे। अध्यापक भी यही सोचते थे कि जयराम ठाकुर किसी अच्छी पोस्ट पर जरूर जाएंगे। लेकिन अध्यापकों को यह मालूम नहीं था कि उनका स्टूडेंट प्रदेश की राजनीति का इतना चमकता सितारा बन जाएगा कि पूरे हिमाचल का नेतृत्व करेगा। जब जयराम ठाकुर वल्लभ कालेज मंडी से बीए की पढ़ाई कर रहे थे तो उन्होंने एबीवीपी के माध्यम से छात्र राजनीति में प्रवेश किया। यहीं से जयराम ठाकुर के राजनीतिक जीवन की शुरूआत हुई। जयराम ठाकुर ने इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। एबीवीपी के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ भी जुड़े और कार्य करते रहे।

घर परिवार से दूर जम्मू-कश्मीर जाकर एबीवीपी का प्रचार किया और 1992 को वापस घर लौटे। घर लौटने के बाद वर्ष 1993 में जय राम ठाकुर को भाजपा ने सिराज विधानसभा क्षेत्र से टिकट देकर चुनावी मैदान में उतार दिया। जब घरवालों को इस बात का पता चला तो उन्होंने इसका विरोध किया। उनके बड़े भाई बीरी सिंह बताते हैं कि परिवार के सदस्यों ने जयराम ठाकुर को राजनीति में न जाकर खेतीबाड़ी संभालने की सलाह दी थी। क्योंकि चुनाव लड़ने के लिए परिवार की आर्थिक स्थिति इजाजत नहीं दे रही थी।

विधानसभा चुनावों में हार का मुंह नहीं देखा
जयराम ठाकुर ने अपने दम पर राजनीति में डटे रहने का निर्णय लिया और विधानसभा का चुनाव लड़ा। उस वक्त जय रामठाकुर मात्र 26 वर्ष के थे। यह चुनाव जय राम ठाकुर हार गए। वर्ष 1998 में भाजपा ने फिर से उनको चुनावी रण में उतारा और उन्होंने जीत हासिल की और उसके बाद कभी विधानसभा चुनावों में हार का मुहं नहीं देखा। जयराम ठाकुर विधायक बनने के बाद भी अपनी सादगी से दूर नहीं हुए। उन्होंने विधायकी मिलने के बाद भी अपना वो पुश्तैनी कमरा नहीं छोड़ा जहां जीवन के कठिन दिन बीताए थे। जयराम ठाकुर अपने पुश्तैनी घर में ही रहे। हालांकि अब उन्होंने एक आलीशान घर बना लिया है और वह परिवार सहित वहां पर रहने भी लगे हैं लेकिन शादी के बाद भी जयराम ठाकुर ने अपने नए जीवन की शुरूआत पुश्तैनी घर से ही की। वर्ष 1995 में उन्होंने जयपुर की डा. साधना सिंह के साथ शादी की। जयराम ठाकुर की दो बेटियां हैं। आज अपने बेटे को इस मुकाम पर देखकर माता का दिल फुले नहीं समाता। जय राम ठाकुर के पिता जेठू राम का गत वर्ष देहांत हो गया है। जयराम ठाकुर की माता ब्रिकमू देवी ने बताया कि उन्होंने विपरित परिस्थितियों में अपने बच्चों की परवरिश की है।

पहले भी रहे हैं महत्वपूर्ण पदों पर
जय राम ठाकुर एक बार सिराज मंडल भाजपा के अध्यक्ष, एक बार प्रदेशाध्यक्ष, राज्य खाद्य आपूति बोर्ड के उपाध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। जब जयराम ठाकुर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष थे तो भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई थी। उन्होंने उस दौरान सभी नेताओं पर अपनी जबरदस्त पकड़ बनाकर रखी थी और पार्टी को एकजुट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।
लेखक
रविन्द्र कुमार अत्री।

गाँव कूंर (जिला चम्बा)
व्यवसाय: पत्रकारिता (दैनिक जागरण)
कार्य क्षेत्र जम्मू-कश्मीर
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