मतगणना नजदीक है/सुशील भारती

नमस्कार प्रस्तुत है….दोहे
‘मतगणना नज़दीक है’

रातें तड़प तड़प कटीं, थे दिन को बेचैन।
बोतल बकरे खरीदे, रखी अराज़ी रहन।।

सफेद बाल तज़ुर्बे से, रखते तेज़ दिमाग।
तीर छोड़ खोपड़ी से, लगे नीर में आग।।

परिन्दों की तो है जाति, तीतर आध बटेर।
उसी ओर घूरते सब, हो जाता जो ढेर।।

धड़के दिल चुनावों में, किसका होगा ताज।
इश्क में धड़के दिल कहाँ, जैसे धड़के आज।।

यारो वज़नी पक्ष संग, भेड़ रहेगी चाल।
बकरे भेड़ होंगे हज़्म, नहीं गलेगी दाल।।

नहीं पूजना बड़ों को, लेने ताक गरीब।
उनके भी मत अनमोल, थे आपके करीब।।

राजनीति दरबार में, ज़्यादा रंगे सियार।
माया के ही लोभ में, है यह भूत सवार।।

सांप डसे संपोलों को, इसमें किसका दोष।
धीमी गति कछुए चले, हार गया खरगोश।।

डूबे हैं फिक्र में सभी, होगा क्या परिणाम।
राधा होगी श्याम की, या मीरा का श्याम।।

मतगणना नज़दीक है, दिल को लेना थाम।
रक्त परिसंचरण खूब हो, है यह दुआ सलाम।।

सुशील भारती, नित्थर, कुल्लू (हि.प्र.)
9816870016

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