बेटी ने पदक ही नहीं भारत का दिल भी जीता

सीमा देवी धाविका

सँघर्ष की आग में जो तपता है, एक दिन आसमान भी उसके आगे झुकता है।

और इसी सँघर्ष की आग से निकली चिंगारी सीमा ने आसमान को सच में झुका कर दिखाया है।

हिमाचल के जिला चम्बा की रहने वाली सीमा ने  एशियन यूथ एथेलेटिक्स चेम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता और साथ ही जीत लिया भारत वासियों का दिल सीमा ने बैंकॉक में आयोजित चैंपियनशिप में 3000 मीटर की दौड़ 10:05:27 मिनट में पूरी कर के कांस्य पदक अपने नाम किया।

 

गरीब परिवार से सम्बंधित:-

कहते हैं लोहे का स्वाद लोहार से नहीं उस घोड़े से पूछो जिसके मुह में लगाम है। उसी तरह जीत क्या होती है ये उसे ही पता है जिसने जीत तक पँहुचने के लिए संघर्षों की बेड़िया तोड़ी हो। चम्बा के रेटा गांव की उड़नपरी ने हिम्मत के बल पर ये मंजिल पायी है।जिस बेटी के सर से बाप का साया भी उठ चुका हो और घर की आर्थिक स्थिति भी खराब हो उस परिवार से निकल कर यदि कोई इस मुकाम को हासिल करता है तो वो काबिले तारीफ है। घर में 6 भाई बहनों में सबसे छोटी सीमा को उसकी माता केसरी देवी और भाइयों का सहयोग मिला।

 

साई होस्टल धर्मशाला की छात्रा:-

सीमा साई होस्टल धर्मशाला में पिछले 2 सालों से प्रशिक्षण हासिल कर रही है। धर्मशाला सीनियर सेकंडरी स्कूल की छात्रा सीमा 12 वीं की छात्रा है।

 

कई रिकॉर्ड अपने नाम:-

    पदक जीतने के बाद सीमा

सीमा ने वर्ष 2015 में साई होस्टल में दाखिला लिया। सीमा ने मेहनत की वो मिसाल कायम की कि मात्र 2 सालो में 2 नेशनल रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर सीमा ने 9 मैडल जीते हैं जिसमे 4 गोल्ड मैडल है। 2016 में तमिलनाडु में यूथ चैंपियनशिप में 2 हजार मीटर की दौड़ मात्र 6 मिनट 27 सेकंड 13 पिक्सन में पूरी करके नेशनल रिकॉर्ड बनाया । इलाहबाद में 3 हजार मीटर की दौड़ 9 मिनट 56 सेकंड 25 पिक्सन में पूरा करके एक और रिकॉर्ड अपने नाम किया।

कड़े सँघर्ष का परिणाम:- 

सीमा के संघर्ष की कहानी बहुत प्रेरणा दायक है ये लाखो युवाओं के लिए एक मिसाल है। सीमा मैदान पर अपना पसीना बहाने से कभी पीछे नहीं हटी। रोजाना कड़े अभ्यास से आज सीमा ने अंतरार्ष्ट्रीय स्तर पर कई दिग्गजों को धूल चटा कर ये कांस्य पदक जीता है।

हिमाचल की तीसरी बेटी:-

इससे पहले हिमाचल की सुमन रावत और कमलेश इस मुकाम को हासिल कर चुकी हैं।

 

सीमा पर गर्व:-

सीमा की इस कामयाबी के लिए पूरा देश और पूरा हिमाचल सीमा पर गर्व कर रहा है। सीमा की ये संघर्ष की कहानी लाखो करोड़ो बेटियों के लिए प्रेरणा है। बेटी है अनमोल का असली उदाहरण है सीमा।

टीम आरएफसी की तरफ से सीमा को बधाई।

 

आशीष बहल चुवाड़ी