बाथू की लड़ी एक पहेली/Ashish Behal

​स्वर्ग की सीढ़ियों वाला मंदिर

मंदिर की विशेषता:-

इस मंदिर की विशेष बात यह है कि ये मंदिर पिछले 45 सालो से पानी मे ही डूबा रहता है और साल के सिर्फ 4 महीने मार्च से जून में ही पानी से बाहर आता है। उस समय इस मंदिर में जाया जा सकता है। बाकी साल के 8 से 9 महीने ये महाराणा प्रताप डैम यानी पोंग डैम के अंदर समा जाता है। इसलिए कहा जाता है कि

बाथू की लड़ी , पानी मे खड़ी 

पानी मे रहने केे वावजूद भी मंदिर को नुकसान नही पंहुचा औऱ उसी पुरानी स्थिति में खड़ा है।

इस मंदिर में कुल 6 मंदिर है जिसमे 5 मंदिर छोटे हैं और एक पंक्ति में खड़े हैं। जिसमे शेष नाग भगवान विष्णु की मूर्तियां स्थापित थी। जबकि एक मुख्य मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है। ये लगभग 5 हजार साल पहले का बताया जाता है। अब यंहा से मूर्तियां उठा कर अन्य मंदिर में स्थापित कर दी गयी हैं। जिसका संरक्षण विश्व हिंदू परिषद के सदस्य करते हैं।

स्वर्ग की सीढ़ियां एक रहस्य:-

इस मंदिर के कई रहस्य हैं कहते हैं कि इस मंदिर का निर्माण पांडवो ने अपने अज्ञात वास के दौरान किया था। पांडव यंहा स्वर्ग की सीढ़ियां बनाना चाहते थे। इसलिए उन्होंने भगवान शिव की आराधना की ओर श्री कृष्ण जी की सहायता से स्वर्ग की पोड़ियाँ बनाने का काम शुरू किया। क्योंकि उन्हें एक रात में ही सीढ़ियों के काम पूरा करना था इसलिए भगवान कृष्ण बे 6 महीने की एक रात कर दी और पांडवो ने 6 महीने में भगवान शिव का मुख्य मंदिर और 5 मंदिर बनाये। परन्तु स्वर्ग की पोड़ियाँ पूरी तरह तैयार नही हो पाई और आज भी कुछ 40 के करीब सीढ़िया वँहा मौजूद है। जिसे लोग बड़ी आस्था के साथ पूजते हैं।


सूर्य की किरण महादेव के चरणों मे:-

इस मंदिर को इस तरह से बनाया गया है कि कोई भी ऐसा दिन नही जाता जब सूर्य बिना शिव मंदिर की मूर्ति को छुए बिना अस्त हो जाये। कहते हैं कि मुग़ल अपने शासन काल में लाख कोशिश के बाद भी सूर्य की किरण को महादेव के चरणों मे गिरने से रोक नही पाए थे। ऐसा अदभुत नजारा आज भी देखा जा सकता है। 

रमणीय स्थान :-


ये स्थान इतना मनमोहक है कि अनयास ही कोई भी इस तरफ आकर्षित हो जाए। एक चारो तरफ पोंग डैम स्थित है और बीच मे ये मंदिर श्रृंखला स्थित है। यंहा पर घूमने जाने वाला मंदिर के चारों ओर के दृश्य को कैमरे में कैद करने के लिए लालायित हो उठता है।

बाथू नाम:- 

इस मंदिर के निर्माण में लगे पत्थर को बाथू का पत्थर कहा जाता है। और मंदिर दूर से देखने पर एक माला में पिरोया हुआ प्रतीत होता है इसीलिए इस खूबसूरत मंदिर को बाथू की लड़ी (माला) कहा जाता है।
आप भी इस मंदिर में एक बार अवश्य आएं और इस अदभुत स्थान का आनंद उठाए। स्वर्ग की सीढ़ियों के दर्शन कर सौभाग्य प्राप्त करें। दर्शन का समय मार्च से जून में ही सबसे उत्तम है।

Mygov India में जगह;- भारत सरकार की आधिकारिक साइट पर भी इसे जगह मिली है एक वीडियो बना कर आशीष बहल की फ़ोटो को शेयर किया गया है।

Written by

आशीष बहल 

लेखक ,कवि और अध्यापक

चुवाड़ी जिला चम्बा हि प्र

Ph 9736296410

Visit 

www.bharatkakhajana.com

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