‘अटल’ नींव पर खड़ी मोदी सरकार/Ashish Behal

अटल नींव पर खड़ी मोदी सरकार

कहते हैं वो घर मजबूत होता है जिसकी नींव पक्की होती है और देश की और भाजपा सरकार की नींव देश के जननायक लोकप्रिय प्रधानमंत्री भारत रत्न से सम्मानित महान विचारक, साहित्यकार, कुशल राजनेता और जन जन के मन मे बसने वाले श्री अटल बिहारी वाजेपयी जी ने रखी थी।

आज अटल जी का 93 वाँ जन्मदिन है। 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में जन्मे अटल जी बहुत ही मध्यवर्गीय परिवार से थे। परन्तु राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सम्पर्क में आने के बाद उनमें देशभक्ति ओर समाज सेवा का ऐसा जनून सवार हुआ कि वो भारत के अविस्मरणीय नेता बन गए। जो बीजेपी आज भारत के 68 % हिस्से पर राज कर रही है इसकी रूपरेखा माननीय अटल जी ने बहुत समय पूर्व ही खींच दी थी। अटल जी उस दौर से इस दौर तक कि राजनीति के अकेले योद्धा रहे हैं। वो भी दौर था जब अटल जी 400 सांसदों वाली संसद में अकेले विपक्षी थे और आज ये भी दौर है कि उनकी पार्टी 400 के करीब है और कांग्रेस 40 के पास।
उस समय के कई दिलचस्प किस्से पढ़ने और सुनने को मिलते है कहते हैं कि जवाहरलाल नेहरू जी ने उन्हें विपक्ष की कुर्सी से उठ कर पक्ष की तरफ आने का न्योता दिया तो माननीय अटल जी ने बाद संजीदगी के साथ जवाब दिया और विपक्ष को पक्ष बनाने का संकल्प लिया। उसी दिन जवाहरलाल नेहरू जी ने कहा कि एक दिन ये लड़का देश का प्रधानमंत्री बनेगा।और उनकी बात सच साबित हुई।


1996 में अटल जी पहली बार 13 दिन के लिए प्रधानमंत्री बने और 13 दिन में उन्होंने समझौतों की राजनीति से ऊपर उठ कर अपनी सरकार गिरा दी पर किसी के आगे झुकना स्वीकार नही किया। उसके बाद 1998 में फिर से सत्ता में आकर 5 साल तक देश का कुशल नेतृत्व किया। उनके द्वारा किया गया कार्य आज भी कई प्रधानमंत्री के लिए अनुकरणीय बना रहेगा। उन्होंने अपने कार्यकाल में देश को नई दिशा और दशा प्रदान की। अपने साथ राष्ट्रपति के रूप में हर दिल अजीज राष्ट्रपति श्री अब्दुल कलाम जी को रखकर उन्होंने अपनी वैचारिक कुशलता का परिचय दिया। अटल जी ने कई ऐसी योजनाओं की शुरुआत उस समय की जो आज भी लागू हैं और गरीबों के लिए वरदान साबित होती हैं। इसमे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना एक सबसे महत्वपूर्ण योजना थी जिसने गांव गांव तक प्रगति की राह आसान की। पूरा भारत अब सड़को से जुड़ पाया है तो इसका श्रेय अटल जी की दूरदर्शी सोच को जाता है।


जनसंघ में कार्य करने से लेकर भारतीय जनता पार्टी के निर्माण में उनका योगदान अद्वितीय रहा है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय से लेकर श्यामाप्रसाद मुखर्जी के साथ मिलकर इस विशाल पार्टी की नींव पड़ी है।
अटल जी किसी एक पार्टी विशेष के भी पैरोकार नही रहे जब वो जीत गए और सरकार के मुखिया बने तो उन्होंने पार्टी से ऊपर उठकर देशहित की बात की ओर इसी की परछाई आज वर्तमान में भी देखने को मिलती है। अटल जी एक ऐसे अजातशत्रु हैं जिनका कोई सानी नही। उन्होंने हमेशा उसूलों की राजनीति की कभी देशहित के कामो में समझौता नही किया।
पोखरण में परमाणु परीक्षण उनकी सशक्त ओर शक्तिशाली विचारों की याद दिलाता है कई विकट परिस्थितियों में अटल जी की विचारशीलता, उनका दृढ़ पन उनके विरोधियों को धराशायी करता है।
1947 से लेकर 1975 के आपातकाल में कई बार जेल में रहने वाले इस महान सैनिक ने कभी देश का साथ नही छोड़ा और हमेशा देश की अजेय पताका लेकर आगे बढ़ते रहे और एक ही बात गुनगुनाते रहे

बाधाएं आती हैं आएं
घिरें प्रलय की घोर घटाएं,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं,
निज हाथों में हंसते-हंसते,
आग लगाकर जलना होगा.
कदम मिलाकर चलना होगा.

अटल जी के कई किस्से उनकी छवि को प्रदर्शित करते हैं एक बार आपातकाल के दौरान जब उपद्रवी तोड़ फोड़ कर रहे थे तो वो तोड़ फोड़ करते हुए प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी के आवास पर पँहुच गए उस समय अटल जी सांसद नही थे इसलिए एक सुरक्षा कर्मी उनके साथ था और वो अकेले ही उन उपद्रवियों से भिड़ गए उपद्रवी उनके होंसले देखकर पस्त हो गए और वँहा से भाग गए। यही कारण था कि उनके विरोधी भी उनके प्रशंसक रहे हैं।
अटल बिहारी वाजेपयी सिर्फ एक व्यक्ति नही थे वो एक व्यक्तित्व थे। अटल जी कविताएं उनके भाषण सुनकर कई युवा राजनीति को समझे हैं उनको राजनीति के प्रति प्रेम और आदर का भाव जागृत करने का काम माननीय अटल जी के भाषणों ने खूब किया है।
ऐसे राजनीतिज्ञ बहुत मुश्किल से मिलते हैं। आज बीजेपी सत्ता का जो स्वाद चख रही है इसका पूरा श्रेय अटल जी को जाता है।
जिस उपवन के फल आज भाजपा खा रही है उसको सींचने का श्रेय सीधे तौर पर माननीय अटल जी को जाता है। आइये आज उनके 93 वें जन्मदिन पर उन्हें बधाई दें और प्रभु से कामना करें कि वो स्वस्थ और दीर्घायु हों। आइये उनकी एक कविता के साथ उन्हें स्मरण करें
2 दो अनुभूतियां

-पहली अनुभूति

बेनकाब चेहरे हैं, दाग बड़े गहरे हैं
टूटता तिलिस्म आज सच से भय खाता हूं
गीत नहीं गाता हूं

लगी कुछ ऐसी नज़र बिखरा शीशे सा शहर
अपनों के मेले में मीत नहीं पाता हूं
गीत नहीं गाता हूं

पीठ मे छुरी सा चांद, राहू गया रेखा फांद
मुक्ति के क्षणों में बार बार बंध जाता हूं
गीत नहीं गाता हूं

-दूसरी अनुभूति

गीत नया गाता हूं

टूटे हुए तारों से फूटे बासंती स्वर
पत्थर की छाती मे उग आया नव अंकुर
झरे सब पीले पात कोयल की कुहुक रात

प्राची मे अरुणिम की रेख देख पता हूं
गीत नया गाता हूं

टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी
अन्तर की चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी
हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा,

काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूं
गीत नया गाता हूं

लेखक

आशीष बहल
चुवाड़ी जिला चम्बा।

9736296410

जन्मदिवस पर आज विशेष अटल जी की शानदार कविताएं


ऑनलाइन पत्रिका भारत का खजाना में पढ़िए आज हर जन के प्रिय नेता अटल जी के जन्मदिन पर उनकी शानदार रचनाएँ, वीडियो और फ़ोटो के साथ।

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