My blog हिमाचली पटल पर “अटल” स्मृति/Ashish

हिमाचली पटल पर “अटल” स्मृति

कुछ व्यक्ति नेता होते हैं, कुछ जन नेता होते हैं , कुछ दल के नेता होते हैं परन्तु कोई विरले ही होते हैं जो हर दिल के नेता होते हैं। हमारे अटल जी हर दिल मे बसने वाले वो नेता थे जो शायद इस युग मे एक बार ही पैदा हुए और वो मरेंगे कभी नही क्योंकि मरते तो व्यक्ति हैं व्यक्तित्व तो हमेशा जिंदा रहते हैं, लोगो के दिलों में उनकी स्मृति में हमेशा जिंदा रहेगी। वैसे तो अटल जी की सादगी की कोई एक कहानी नही है वो तो खुद अपने आप मे एक पूरा जीवन परिचय हैं। 25 दिसम्बर 1924 से 16 अगस्त 2018 तक शायद ही उनकी जिंदगी का कोई ऐसा दिन हो जब उनके जीवन से कुछ सीखने का न मिला हो। अपने जहन में मात्र राष्ट्रहित सर्वोपरि का एक विचार लेकर आगे बढ़े और उन्होंने कभी देशहित से समझौता नही किया। यही कारण है कि आज “राष्ट्र पुरुष” “युग पुरुष” और “राष्ट्र रत्न” जो जिस मन से वाजेपयी जी को याद कर रहा है वैसी ही संज्ञायें अपने प्यारे अटल जी को दे रहा है। अटल थे भी कुछ ऐसे ही बच्चो के दोस्त बन जाते ,युवाओं के साथी, बुजुर्गो के सहारा बन जाते थे।

राजनीति से ज्यादा वो राष्ट्रनीति पर विश्वास करते थे यही कारण है कि उन्हें “अजातशत्रु” कहा जाता है क्योंकि राजनीति के कीचड़ में भी वो खुद को बेदाग बचा लाये। जिस व्यक्ति ने 50 साल राजनीति में लगाएं हो और एक मुंह उन्हें बुरा बोलने वाला न मिले तो आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि उनका जीवन मात्र मनुष्य जीवन नही था वो देवात्मा से कम नही थे। आपको भारत मे महात्मा गांधी, नेहरू से लेकर भगवान कृष्ण तक को कोसने वाले मिल जाएंगे परन्तु अटल जी को सिर्फ प्रेम करने वाले ही मिलेंगे। यही कारण है कि उन्हें हिमाचल के भोले भाले लोग ओर हिमाचल प्रदेश विशेष रूप से बहुत पसंद था वो हिमाचल को अपना घर मानते थे। अपनी पुत्री के ससुराल होने के नाते कुल्लू से उनका गहरा नाता था। मनाली के प्रीणी गांव का जब जब जिक्र आता है तो तब तब अटल जी की याद भी जहन में ताजा हो जाती है। अटल जी हिमाचल से इतना गहरा सम्बद्ध रखते थे कि प्रधानमंत्री रहते भी उन्होंने कुछ दिन सरकार मनाली में रह कर ही चलाई। उनके चाहने वाले कई ऐसी यादें सांझा करते हैं और खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं कि कभी उन्होंने देश के महान रत्न के साथ समय बिताया है। हिमाचल को स्पेशल औद्योगिक पैकेज की बात हो या हिमाचल को संकट के समय मे वीरभद्र सरकार को दिया स्पेशल पैकेज उनके हिमाचल के प्रति अपनेपन की झलक को दर्शाता है। पूर्व प्रधानमंत्री के निधन पर हिमाचल में तो मातम ही छा गया। लोगों ने अपने प्यारे अटल को भीगी आंखों से श्रधांजलि अर्पित की।

हिमाचल के संदर्भ में याद करें तो हिमाचल को देश को उनका सबसे बड़ा तोहफा रोहतांग सुरंग है। रोहतांग सुरंग कोई आम सुरंग नही ये अटल जी के सपनो की सुरंग है एक ऐसा सपना जो एक प्रधानमंत्री ने देश की सुरक्षा के लिहाज से देखा और एक ऐसा वादा जो एक दोस्त ने अपने दोस्त से किया। जी हाँ ,कहते हैं अटल जी अपने दोस्त टशी दावा उर्फ अर्जुन गोपाल से वादा किया था कि वो ये सुरंग बनाएँगे अब तो उनका दोस्त प्रधानमंत्री है इसलिए ये सुरंग दोस्ती की मिसाल भी है। अर्जुन गोपाल और अटल जी की दोस्ती जग जाहिर है अर्जुन गोपाल से वाजेपयी जी की दोस्ती संघ के वर्ग में हुई थी और जब अटल जी प्रधानमंत्री बने तो टशी दावा जी ने 1998 में अटल जी को लाहौल घाटी के मुश्किल हालात के बारे में बताया अटल जी ने प्रधानमंत्री रहते केलांग का दौरा किया और इस ऐतिहासिक सुरंग बनाने की घोषणा की। आज ये सुरंग बन कर तैयार है पर अफसोस आज दोनो ही दोस्त इस दुनिया मे मौजूद नही। इसके अलावा भी हिमाचल को विशेष आर्थिक सहायता के रूप में 900 करोड़ की राशि देने की बात हो या फिर कई परियोजना की शुरुआत सब अटल जी की दूरदर्शी सोच को दर्शाता है। एशिया की सबसे बड़ी विद्युत परियोजना पार्वती जल विद्युत परियोजना की नींव अटल जी ने 9 दिसम्बर 1999 को रखी थी इसके अलावा कोल डैम परियोजना का विशेष तोहफा भी अटल जी के देन है। अटल जी के प्रयासों से ही चम्बा में चमेरा प्रोजेक्ट को गति मिली थी। विशेष पैकेज के रूप में जब धूमल जी को 400 करोड़ दिया तो अन्य राज्य पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्री भी विशेष आर्थिक पैकेज चाहते थे उन्होंने वापसी पर चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर उनसे हिमाचल की तर्ज पर आर्थिक पैकेज की मांग की तो वाजेपयी जी ने कहा हिमाचल तो मेरा घर है, आप कुछ और बात करो। इसी से उनके हिमाचल प्रेम का अंदाजा लगाया जा सकता है ।

उनका हिमाचल से ऐसा विशेष सानिध्य था कि जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और माननीय वीरभद्र जी मुख्यमंत्री थे तब भी वार्षिक योजना के वितीय घाटे की भरपाई के लिए 683 करोड़ का विशेष पैकेज देकर हिमाचल की मदद की थी। यही कारण है कि आज चाहे किसी भी दल का नेता हो वो माननीय वाजेपयी जी के निधन पर शोकग्रस्त दिखता है। क्योंकि सरकारों पर ओर देश प्रदेश पर राज करने वाले कई नेता मिल जाएंगे पर दिलों पर राज करने वाला कोई विरला ही मिलता है। अटल जी अंतिम बार 2006 मे जब मनाली आए तो उनका स्वागत गांव वासियों ने ऐसे किया जैसे मानो भगवान राम आये हों और गांव वासी उन्हें किसी आराध्य से कम नही मानते थे।

कहते हैं जब अटल जी गांव के स्कूल में किसी छोटे से कार्यक्रम में गए तो वँहा के स्कूली बच्चों को भेंट स्वरुप 15000 रुपये दिए और अपने उसी देसी अन्दाज और शायराना आवाज में कहने लगे अब तुम्हारे मामा की नोकरी नही रही अब बस मेरे पास इतने ही हैं। और सब ठहाका मार कर हंसने लगे। अटल जी जैसी शख्सियत अपने साथ सिर्फ प्रेम लेकर आई थी और दुनिया को प्रेम सीखा कर चली गयी। अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल में भी उनके द्वारा लिए गए फैंसले आज भी मार्गदर्शक बने हुए हैं।

अटल जी द्वारा शुरू की गई जिस योजना का मैं व्यक्तिगत रूप से बहुत मुरीद हूँ वह है “प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना” उनकी इस योजना को उन्ही के भाषण की कुछ पंक्तियों से जोड़ना चाहता हूँ अटल जी ने संसद में कहा था

सरकारें आएंगी ,जाएंगी पार्टियां बनेंगी , बिगड़ेंगी ये देश बचना चाहिए, ये देश बचना चाहिये।

और यही उनका व्यक्तित्व था उन्होंने देश को बनाने और बचाने का वो शानदार काम किया कि आज भी उनके द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना गांव में राह रहे लोगों के लिए वरदान है। शायद ये योजना नही होती तो देश के हजारों गांव आज भी सड़क से महफूज होते। सरकारें बदली पार्टियाँ बदली पर उनके द्वारा शुरू की गई योजना को वैसे ही चलाए रखा गया यही उनके ओजस्वी पूर्ण व्यक्तित्व का उदाहरण है। अटल जी को और भी कई कामो के लिए देश याद करेगा फिर चाहे वो भारत पाकिस्तान के बीच दोस्ती के लिए उनकी पहल हो या 1999 में कारगिल युद्ध मे भारत की विजय। अटल जी के साहसिक फैंसले उनके व्यक्तित्व का आईना थे। उन्हें इसलिए भी याद रखा जाएगा कि अपने आदर्शों से समझौता न करने वाले शख्स के कारण उन्हें सबसे कम समय मात्र 13 दिन के भीतर प्रधानमंत्री पद त्यागना पड़ा था। 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण करके पूरी दुनिया को अचंभित करने वाले अटल, अडिग ओर साहसिक व्यक्ति अटल जी ने ये कार्य तब किया जब वो गठबन्धन सरकार चला रहे थे भले ही उन्हें उसके बाद पड़ त्यागना पड़ा हो पर देश की अस्मिता और देश के गौरव से कभी समझौता नही किया अटल जी ने। राजनीतिक दुश्मनों के घर मे घुस कर भी वो प्रेम के गीत सुनाते थे। उनकी कविताओं और लेखनी का तो वो शख्स भी दीवाना हो जाता है जो साहित्य में रुचि नही रखता। उनकी कविताएं मनुष्य के अंदर के इंसान को जगाने का काम करती थी। उनकी कविता

बाधाएं आती हैं आएं,
घिरें प्रलय की घोर घटाएं
पावों के नीचे अंगारे
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं
निज हाथों में हंसते हंसते
आग लगा कर जलना होगा,
कदम मिला कर चलना होगा

आज भी ऐसी कवितायें मार्गदर्शन करते हुए साथ कदम बढ़ाने का संदेश देती हैं। अटल जी की शख्सियत का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि वो 6 बार अलग अलग लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़कर विजयी हुए। उनके व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली था कि हर कोई अटल वाणी का मुरीद हो जाता था। 1977 में विदेश मंत्री के रूप में पहली बार संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी में दिए उनके भाषण को कौन भूल सकता है उस समय कहा जाता था मानो स्वामी विवेकानंद जी इस धरती पर फिर से अवतरित हुए हों ऐसे थे अटल जी। शायद उनके बारे में लिखने के लिए इतना कुछ है कि समुन्द्र यदि स्याही बन जाए और पृथ्वी कागज तब भी उनके बारे में पूरा न लिख सकूँ। कहते हैं कि मरने से पहले दो काम जरूर करना

“पढ़ने लायक कुछ लिख जाना और लिखने लायक कुछ कर जाना”

और अटल जी ये दोनों काम बखूबी करके गए हैं। उनकी लिखी कविताएं युगों युगों तक नव चेतना का संचार करेंगी और उनके द्वारा किए गए कार्य कई लेखकों के लिए शोध का विषय रहेंगे। आइये हम सब मिलकर इस ‘अटल’ स्मृति को अपने मन मे और ‘अटल’ कर लें और हमेशा ‘अटल’ पथ पर चलने का ‘अटल’ प्रण लें।
अटल जी की इन पंक्तियों के साथ उन्हें श्रद्धांजलि

मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं,
लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं?

आशीष बहल
चुवाड़ी जिला चम्बा
Ph 9736296410

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