बच्चे की चित्रकारी देख आप भी रह जायेंगे दंग

  1. आरएफसी ने तलाशा ये नायाब हीरा
By Anoop kumarसरकारी विद्यालयों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है जरूरत है प्रतिभा की सही परख और सही सम्मान की। आज आपको परिचित करवाते हैं ऐसे ही प्रतिभा के धनी एक नन्हे चितेरे से। जी हां, भट्टियात क्षेत्र के खरगट से दूर वसे एक छोटे से गांव द्रमन का अनूप कुमार। अनूप कुमार की चित्रकला में प्रतिभा ऐसी की हर कोई हैरान हो जाये। रंगों की ऐसी जादूगरी और हाथों का ऐसा हुनर की हर कोई दांतो तले उंगली चवा ले। खरगट वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला का ये छात्र चित्रकला में अपनी अलग पहचान बना रहा है।

 

 

 

अनूप कुमार एक गरीब बी पी एल परिवार से सम्बद्ध रखता है। पिता श्री तरवीज कुमार मजदूरी करते हैं। घर में अनूप के अलावा अनूप की माता, 2 बहने और एक भाई है। अनूप की सारी शिक्षा सरकारी विद्यालय में ही हुई और वंही से इसकी प्रतिभा को निखार आया। अब इस वर्ष अनूप ने अपनी 12वीं की पढ़ाई प्रथम स्थान हासिल कर के वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला खरगट से पूरी की।

 

अध्यापको की भूमिका:- अनूप की प्रतिभा को निखारने में उसके कला अध्यापक श्री सुरजीत जी और खरगट स्कूल के प्रधानाचार्य श्री गजेंद्र जी का बहुत योगदान है। अनूप के अध्यापक सुरजीत जी बताते हैं कि जब उन्होंने अनूप को सातवीं कक्षा में पढ़ाया तो उसकी कला को परख लिया और उसे चित्रकला के गुर सिखाए। परन्तु उसके बाद जब उन अध्यापक ने स्कूल छोड़ दिया तो अनूप का हुनर कंही खोता गया। जब कला अध्यापक सुरजीत जी फिर खरगट स्कूल में आए तो अनूप कुमार 9 वीं कक्षा में पँहुच चूका था और ड्राइंग छोड़ कर कंप्यूटर विषय पढ़ रहा था। ड्राइंग अध्यापक को वापिस आया देख अनूप के मन की कला एक बार फिर हिचकोले लेने लगी और अनूप ने मात्र एक माह तक कंप्यूटर पढ़ने के बाद फिर से ड्राइंग विषय को चुना। और फिर शुरू हुआ अनूप की कला का सफर अनूप के गुरु ने अनूप को कई प्रकार से कला के गुर सिखाए। अनूप सीखता गया और 1 साल के भीतर बहुत बढ़िया चित्र बनाने लग पड़ा।

स्कूल के प्रधानाचार्य श्री गजेंद्र शर्मा जी ने भी जब अनूप की कला को देखा तो उसकी मदद के लिए आगे आये और जालंधर से पेंटिंग के कागज, रंग आदि लेकर अनूप को दिए।

आरएफसी क्लब चुवाड़ी ने तलाशा हीरा:-

शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में काम करने वाले आरएफसी क्लब चुवाड़ी की टीम जब एक दिन खरगट स्कूल में बच्चो की प्रतियोगिता करवाने पँहुची तो अनूप कुमार की अदभुत प्रतिभा के बारे में जाना और बस फिर आरएफसी ने लोगो के बीच अनूप की कला को लाने का फैसला लिया और अपने वार्षिक कार्यक्रम में अनूप के चित्रों की प्रदर्शनी चुवाड़ी चौगान में लगाई जंहा हर कोई अनूप की प्रतिभा जान कर हैरान रह गया तब अनूप 10 वीं कक्षा का छात्र था। कई लोगो ने अनूप को इनाम स्वरूप राशि भेंट की। यंही से अनूप ने अपने अंदर की ताकत को जाना और उसे समझ आया कि कला की कद्र भी होती है। अनूप उसी दिन से आरएफसी के साथ जुड़ गया।

 

पद्मश्री विजय शर्मा जी से भेंट:-

आरएफसी की टीम ने इस छोटे चित्रकार को पद्मश्री विजय शर्मा जी से मिलवाने का निर्णय लिया और जब अनूप को चम्बा में पद्मश्री से मिलवाया तो एक मिनट के लिए पद्मश्री भी अनूप की प्रतिभा को देख कर दंग गए। और उन्होंने अनूप को पेंटिंग से सम्बधी सामान उपलब्ध करवाया और अपना आशीर्वाद स्वरूप अनूप कुमार का ही स्केच अपने हाथों से बना कर दिया।

 

अनूप ने बनाया पद्मश्री का चित्र:-

अनूप ने भी गुरु को भेंट स्वरूप उनका एक चित्र आरएफसी के वार्षिक समारोह में भेंट किया। अनूप कुमार कई राजनेताओं और पशु पक्षियों और देवी देवताओं के चित्र बना चुका है। और सबसे बड़ी बात ये कि सारे चित्र पेंसिल कलर से ही बनाता है।

 

पढ़ाई में भी अव्वल:-

 

जब तक अनूप के अंदर की कला में निखार नहीं आया था तब तक अनूप एक औसत स्तर का बालक था जो कक्षा में 45 से 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करता था। अनूप के प्रधानाचार्य बताते हैं कि जब अनूप कुमार चित्रकला की विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने लगा तथा स्कूल से बाहर जिला स्तर तक इनाम जितने लगा तो उसके अंदर जितने की ललक और बढ़ गयी और उसे प्रथम आने का जैसे नशा चढ़ गया और उसने चित्रकला के साथ साथ पढ़ाई में भी अव्वल आने का प्रण लिया 10 वीं की परीक्षा में 72 प्रतिशत अंक 11 वी में स्कूल में प्रथम और 12 वीं में 79 प्रतिशत अंक लेकर विद्यालय में टॉप किया। ये अनूप की कड़ी मेहनत और निष्ठां को दर्शाता है।

 

सँघर्ष की राह:-

अनूप के लिए सब कुछ इतना आसान नहीं है। बी पी एल परिवार से सम्बद्ध रखने वाले अनूप के घर में न तो कोई और कमाने वाला है और न ही कोई पढ़ा लिखा। पैसो के आभाव के कारण पेंटिंग सम्बंधित सामान का मिल पाना अनूप के लिए एक बड़ी चुनोति है इसलिए आगे की पढ़ाई कैसे की जाये इसको लेकर भी एक मुश्किल सवाल खड़ा है। कुछ आमदनी भी हो जाये इस के लिए अनूप कभी कभी यंहा वँहा वाल पेंटिंग और बोर्ड वगेरा लिखने का काम भी करता है।

 

पद्मश्री विजय शर्मा जी का कहना है कि मैं अनूप से 2 बार आरएफसी क्लब के माध्यम से मिला हूँ। बालक में अदभुत कला है छोटी उम्र में खुद को काफी तैयार किया है अनूप ने। वो भविष्य में और अच्छा कर सके इसके लिए उसे मैंने समझाया है। जैसे जैसे उसका शारीरिक विकास होगा वैसे ही उसकी कला और निखर कर सामने आएगी। मेरी और से जो बन पाएगा मैं बच्चे के लिए करूँगा। सँघर्ष में तप कर ही कला में निखार आता है और अनूप का भी इस सँघर्ष में तपने का समय चला है।

 

प्रधानाचार्य श्री गजेंद्र शर्मा जी का कहना है कि बच्चे में प्रतिभा है और एक गुरु होने के नाते मैं उसकी प्रतिभा को निखारने और संवारने में हर संभव मदद करूँगा।

 

आरएफसी के चेयरमैन श्री राम प्रसाद शर्मा जी का कहना है कि अनूप को पढ़ाई के लिए और आगे बढ़ने के लिए जंहा भी आरएफसी का सहयोग चाहिये वो हमेशा उसकी मदद करेंगे।

लेखक परिचय

आशीष बहल

अध्यापक लेखक कवि

आरएफसी सदस्य

9736296410

 

One comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *