• चुवाड़ी रायपुर का अनन्य पुरोहित घूम चूका है 90 देश

कहते हैं कि मुश्किल तो सिर्फ एक कदम बढ़ाना है, बढ़ जाये जो इससे आगे , उसके लिये हर मंजिल आसान है।

कुछ ऐसा ही मुश्किल राहों से गुजर कर आसमान का सफर चुना जिला चम्बा के चुवाड़ी के नजदीक बसे एक छोटे से गांव रायपुर के अनन्य पुरोहित ने। छोटे से गांव जंहा मूलभूत सुविधाओं का भी आभाव हो ऐसे गांव से निकल कर एक ऐसी मिसाल पेश की जो कि कई युवाओं के लिए प्रेरणा है। और ऐसा इलाका जंहा इस करियर के बारे में लोग सोचते भी नहीं। दुनिया की सबसे बेहतरीन एयरवेज सर्विस कतर एयरवेज में सीनियर फ्लाइंग स्टीवर्ड के पद पर तैनात है चुवाड़ी का अनन्य।

प्रारम्भिक शिक्षा:-

अनन्य ने अपनी 10 वीं तक प्रारंभिक शिक्षा रायपुर के सरकारी स्कूल में की और 12 वीं की शिक्षा पूरी करने के लिए नजदीक लगते सरकारी स्कूल चुवाड़ी में आ गया। उस समय करियर के बारे में कुछ जानकारी नहीं थी दूसरों की देखा देखी में जो हाथ आया उसी पढ़ाई में घुस गए यही कारण था कि चुवाड़ी में 12 वी की शिक्षा पूरी करने के बाद बी सी ए की पढ़ाई पठानकोट के बदानी कॉलेज में की। बी सी ए को लेकर कोई खास रूचि मन में नहीं पनपी इसलिए पढ़ाई पूरी करने के बाद मंजिल की तलाश शुरू की।

मंजिल का सफर:-

बी सी ए करने के बाद नोकरी की तलाश में घूमते घूमते टाटा स्काई में हाथ आजमाया। 2 साल तक टाटा स्काई में काम करते हुए अपने असली मकसद का भी एहसास हुआ कि मंजिल ये स्काई नहीं असली स्काई है यानि एयरवेज के हवाई जहाज। सपने तो आकाश को छूने के थे बचपन में जब कभी हवाई जहाज की आवाज सुन कर आँखे उसे तलाशती थी कंही न कंही वो तलाश अभी भी जारी थी। अपने दोस्त के सम्पर्क में आने के बाद दोस्त ने अनन्य को बताया करियर का ये रास्ता भी। किसी तरह एयरलाइन्स स्पाइस जेट में एक क्रू मेंबर के रूप में ढाई साल काम किया और रोमांच के इस सफर में पूरी तरह से समा गया। पहली बार हवाई जहाज देख कर अचंभित होने वाले अनन्य ने फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखा जैसे जिस रास्ते को वो तलाश रहा था वो रास्ता मिल चुका था अब बस चलना शेष था।

क़तर का सफर:-

पर लक्ष्य था विश्व की सबसे बेहतरीन एयरवेज में काम करने का इसीलिए फ़्लाइंग स्टीवर्ड की परीक्षा पास करके क़तर एयरवेज में 2 सालों से सीनियर फ़्लाइंग स्टीवर्ड के रूप में काम करने का मौका हासिल हुआ।

 

रोमांच के साथ चुनोति भी:- इसमें कोई राय नहीं की स्टीवर्ड के रूप में रोमांचित सफर का एहसास होता है परंतु कई बार गम्भीर चुनीतियों से सामना हो जाता है। और ऐसे विपरीत परिस्थिति में खुद के  साथ साथ हवाई जहाज में सवार ज़िन्दगियों को बचाने की जिम्मेदारी भी होती है। अनन्य बताते है कि पिछले लगभग 6 सालो के इस सफर में कई बार मौत के मुंह तक जाते जाते बचे हैं। पर अब सब कुछ बहुत आसान लगता है।

अलग अलग देशो और उनकी जलवायु के हिसाब से खुद को समायोजित कर पाना भी शुरू शुरु में गम्भीर चुनोति थी। खाना पीना रहन सहन सब कुछ बदल कर आज इस मंजिल को पाने में आगे बढ़ पाया हूँ।

परिवार:-

अनन्य बताते है कि रायपुर गांव में बसे परिवार में जंहा पर बाजार तक भी आने के लिए बड़ो की ऊँगली पकड़ कर आना पड़ता था और घर वाले जिसे एक मिनट भी अपनी आँखों से ओझल न होने दें ऐसे गांव और परिवार से निकल कर आज लगभग 90 देश घूम चूका हूँ और ये किसी सपने से कम नहीं लगता।

अनन्य के पिता श्री सुरेंद्र शर्मा जी पोस्टमॉस्टर है और माता जी गृहणी है । एक छोटा भाई है चेतन्य पुरोहित।

सपना है अपनों के लिए कुछ करना:- अनन्य पुरोहित अपने इलाके और अपने लोगो के लिए कुछ करना चाहते हैं इसलिए अपने दोस्तों द्वारा बनाये गए आरएफसी क्लब चुवाड़ी में यथासम्भव मदद समाजहित में करते हैं।

 

आशीष बहल चुवाड़ी