सावन के झूले।
सावन के महीने का हमारी संस्कृति में विशेष स्थान है। सावन महीने को बहुत ही पवित्र महीना माना जाता है। इस महीने में लोग कई प्रकार के पुण्य कार्य,व्रत,कथा इत्यादि करते हैं। आपने अपने घरों में भी इस प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान होते हुए देखें होंगे।
सावन का झूला:-
वैसे तो बदलते समय और सिकुड़ते परिवारों के बीच आंगन से झूला अब गायब ही हो गया है परंतु इस मौसम में झूला झूलना भी एक प्रकार की महत्वपूर्ण गतिविधि है। प्राचीन काल मे श्री कृष्ण और राधा के झूले झूलते कई किस्से कहानियां प्रचलित है

बरसात के मौसम में जब रिमझिम फुहारों से रोम रोम खिल उठता है। ऐसे में झूले का मजा लिया जाए तो दिल खुश हो जाता है। तीज के अवसर पर महिलाएं झूला झूल कर कई प्रकार के गाने गुनगुनाती हुई अपनी खुशी व्यक्त करती हैं। हिंदी सिनेमा पर भी सावन के कई गाने सुनने को मिलते हैं।

झूले का वैज्ञानिक दृष्टिकोण:-
धार्मिक दृष्टि के साथ साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी झूला झूलना स्वाथ्य के लिए लाभदायक है। जानकारों के अनुसार बारिश के मौसम में जठराग्नि क्षीण हो जाती है। इस मौसम में पाचन शक्ति काफी कमजोर हो जाती है। इस मौसम में झूला झूलने से ताज़ी हवा से जठराग्नि को बहुत लाभ मिलता है।
सुहाना मौसम:-
सावन का मौसम बहुत ही सुहाना होता है। बरसात अपने चरम पर होती है इसलिए चारों तरफ हरियाली ही हरियाली छाई रहती है। ऐसा लगता है कि मानो प्रकृति ने खुद को धो दिया हो और दुल्हन की भांति श्रृंगार कर लिया हो। हरे भरे मौसम में मन भी रोमांचित हो जाता है।

इस मौसम में धूल के कण,कार्बन के कण और कई हानिकारक तत्व बारिश के साथ जमीन पर आ जाते हैं। जिससे कि आसपास की वायु पूर्णतया शुद्ध हो जाती है। अन्य ऋतुओं और मौसम में ये कण जमीन से कुछ ऊपर ही रुके रहते हैं परन्तु सावन महीने में अधिक वर्षा के कारण ऐसा नही होता। बारिश में ये कण जमीन पर बैठ जाते हैं इसलिए झूला झूलने के दौरान जब हम हवा में शरीर को लहराते हैं हमें ताज़ी हवा मिलती है और ताज़ी हवा हमारे फेफड़ो तक जाती है। इसिलए आपने बागों में झूले पड़े हुए देखे होंगे।
इससे शरीर का व्यायाम तो होता ही है साथ ही प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन भी शरीर को मिलती है जो स्वस्थ रहने के लिए बहुत जरूरी है। कई बार बड़े वुजूर्ग इन दिनों सैर करने की सलाह भी देते हैं। झूला झूलते समय शरीर के सारे अंग हरकत में आ जाते हैं जिससे शरीर मजबूत होता है ।

खान पान :- इन दिनों खान पान में भी कई बदलाव देखने को मिलते हैं घर मे कई प्रकार के छोटे छोटे त्योहार मना कर प्रकृति से मिलने वाली शुद्ध चीज़ों का व्यंजन बनाया जाता है। जैसे पत्रोरु, पकोडू, भटुरु इत्यादि। इस दिन चिडणु दी सग्राण्द, जोडू पत्रोदु दी सग्राण्द , मिंजर त्योहार, तीज, सैर आदि मुख्य त्यौहार घरों में विशेष रुप से मनाए जाते हैं।

आशीष बहल
चुवाड़ी जिला चम्बा

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