स्वच्छता ही सेवा/आशीष बहल

स्वच्छ भारत का संकल्प, सिद्धि की ओर

भारत मे आजकल सबसे अधिक चर्चा है स्वच्छता की। आज से 3 साल पहले गांधी जयंती पर 2 अक्टूबर 2014 को भारत के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भारत वासियों से संकल्प लिया कि भारत को एक स्वच्छ राष्ट्र बनाएंगे और आज 3 सालो में ये संकल्प, सिद्धि की ओर अपने कदम बढ़ाता नज़र आ रहा है। स्वच्छ भारत की संकल्पना मात्र एक इंसान के सोचने से पूर्ण नही हो सकती इसके लिए सभी को अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी आवश्यक है। हम यूँ कह सकते हैं कि भारत को स्वच्छ तभी किया जा सकता है जब स्वच्छता हमारे व्यवहार में समावेशित हो जाए। हमारे आचरण में स्वच्छ्ता दिखे। 3 साल पहले 2 अक्टूबर 2014 में भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की याद में स्वच्छ भारत का सपना सब भारत वासियों ने देखा। सारे भारत ने एक होकर इस पुण्य कार्य मे योगदान दिया। और योगदान दें भी क्यों न क्योंकि स्वच्छता किसे पसन्द नही होती। स्वच्छता वो है जो स्वेच्छा से की जाए।

आजकल प्रधानमंत्री जी के द्वारा एक नया कार्यक्रम शुरू किया गया है।”स्वच्छ्ता ही सेवा”। ये एक बहुत ही प्रेरणादायी वाक्य है कि सेवा का भाव मन मे जागृत हो। हमारे मन मे स्वच्छता के प्रति प्रेम जागृत हो। स्वच्छता ही सेवा के तहत आप आदमी के पास
समय होगा खुद का आकलन करने का , खुद के कर्तव्य जानने का। हमे खुद से प्रश्न करना होगा कि आखिर स्वच्छ भारत के अभियान में मेरा अपना क्या सहयोग रहा। स्वच्छ अभियान का हमारे देश पर या यूँ कहे कि देश वासियों पर क्या प्रभाव पड़ा तो ये उचित समय है 3 वर्षो में खुद के आकलन करने का। मेरा मानना है कि स्वच्छ्ता अभियान के लक्ष्य को मात्र सरकारी योजनाओं द्वारा अमलीजामा नहीं पहनाया जा सकता इसके लिए सबसे अधिक आवश्यक है कि स्वच्छ्ता को नैतिक कर्तव्य समझा जाये। हर व्यक्ति को ये समझना होगा कि स्वच्छ्ता की शुरुआत सिर्फ और सिर्फ खुद से शुरु कर के ही की जा सकती है। आज समस्या ये है कि हम लोग स्वच्छ्ता को मात्र किसी सरकारी कार्य के तौर पर देख रहे हैं। कोई कार्यालय साफ़ होना चाहिए क्यों क्योंकि भाई मोदी ने कहा है। और फिर कार्यालय को अटपटे मन से साफ़ करना और अगर कंही सफाई व्यवस्था अच्छी न हो तो शिकायत करना या अधिक से अधिक एक फोटो खिंचवाने तक ही आज स्वच्छता अभियान को केंद्रित किया जा रहा है। प्रश्न इस से भी बढ़कर है कि क्या मैंने अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया या नहीं ? यदि उत्तर हाँ है तो और बेहतर कैसे हो और नहीं तो शुरुआत करने का उचित समय है। परंतु इन सब के बीच कुछ अच्छा हुआ तो ये कि हर कोई इस बात को मानने और समझने लग पड़ा कि स्वछ्ता का एक अभियान भारत में चला है और सरकारी तंत्र भी उसमें बहुत सजग है। सरकार इस और कितनी क्रियाशील है इसी से समझा जा सकता है कि भारत सरकार ने इस पर 62000 करोड़ रूपये खर्च करने का लक्ष्य रखा है और सरकारी और गैर सरकारी तंत्र के हर आदमी को इस अभियान में जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।अब प्रश्न एक और उठता है कि आखिर एक आम आदमी को कैसे समझाया जाये कि ये हम सब का नैतिक कर्तव्य है कि हम लोग सफाई रखें।

इसके लिए लोगो को व्यवहारिक बनाना अति आवश्यक है। जब एक आम आदमी को इस बात का ज्ञान होगा कि स्वच्छता भी एक सेवा है तो वो इस बात को जानेगा कि ये सेवा की शुरुआत उससे ही होगी ।इस तरह स्वच्छता ही सेवा में सेवा करने के लिए कंही बाहर नही जाना पड़ेगा बल्कि उसकी शुरुआत उसके अपने से ही हो जाएगी।
लोगो मे स्वच्छता के प्रति जागरूकता के साथ साथ प्रेम भी बढ़ा है इसमें कोई शक नही। पहले हम कूड़ा कंही भी इधर उधर फैंक देते थे अब उसके लिए एक सही स्थान तलाशते हैं। कूड़ा इधर उधर फैंकने से अच्छा है उसे सही जगह निपटाया जाए। स्वच्छता की शुरुआत अगर घर से होती है इस बात को समझ कर लोगो ने शौचालय के अभियान में बढ़ चढ़ का हिस्सा लिया। आज भारत के बहुत से राज्य बाहरी शौच मुक्त घोषित कर दिए गए हैं।
3 सालो में 3.8 करोड़ शौचालय का निर्माण किया गया। 2 लाख गांव, 147 जिले और पांच राज्य खुले में शौच से मुक्त घोषित किये गए। ये पांच राज्य हैं सिक्किम, हिमाचल प्रदेश,हरियाणा,उत्तराखण्ड, केरल जिन्हें भारत सरकार द्वारा खुले में शौच मुक्त का दर्जा दिया गया है। इससे इस बात का अंदाज़ा लगाया ज सकता है कि लोगो मे स्वच्छता के प्रति कितनी सोच बदली है और इस बात को चिरतार्थ करने में लगे हैं कि “जंहा सोच है वँहा शौच है”। इससे जो सबसे अधिक लाभ हुआ वो है देश की माताओं बहनो को आज घर मे शौचालय होने से उनकी ज़िंदगी मे एक बदलाव आया है।
इसलिए हम कह सकते हैं कि स्वच्छता तभी होगी जब हम स्वच्छ रहना चाहेंगे ओर आसपास के परिवेश को स्वच्छ रखने का संकल्प लेंगे। इस संकल्प को सिद्धि तक पंहुचाना हमारा कर्तव्य है। स्वच्छता को अपने मूल्यों में उतारना होगा और इसे सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी न मान कर अपना नैतिक कर्तव्य समझना होगा। बहुत जल्द हम एक ऐसा भारत देखेंगे जो सच मे स्वच्छ होगा। आओ स्वेच्छा से स्वच्छता की ओर कदम बढ़ाए, इस संकल्प को सिद्ध बनाएं।

आशीष बहल

अध्यापक
चुवाड़ी जिला चम्बा
हिमाचल प्रदेश
9736296410

One comment

  1. बहुत सुन्दर लेख……आभार
    बहुत सही कहा इसे केवल सरकारी कार्य समझ कर ही नहीं किया जाय। यह जिम्मेदारी हमारी.है सबकी है।
    नमन

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