क्या एक ही आदमी, एक आम आदमी…
मिसाइल मैन …भारत रत्न …
जनता के राष्ट्रपति …यूथ आइकॉन हो सकता है?
जी हाँ, वह सिर्फ डॉ कलाम ही हो सकते है…
अवुल पकिर जैनुलाब्बीन अब्दुल कलाम आमतौर पर
एपीजे के नाम से जाने जाते है. अब्दुल कलाम 2002
से 2007 तक भारत के 11 वें राष्ट्रपति रहे. जनता के
राष्ट्रपति के रूप में लोकप्रिय अब्दुल कलाम का
भारत को परमाणु शक्ति बनाने बेहद बड़ा योगदान
है और बैलिस्टिक मिसाइलों और अंतरिक्ष रॉकेट
प्रौद्योगिकी के विकास पर अपने काम के लिए
‘मिसाइल मैन ऑफ इंडिया’ के रूप में प्रसिद्ध हुए.
बहुत कम लोग इस महान व्यक्ति की तरह हैं जो
राजनीति में प्रवेश करते हैं इससे अछूते रहे हो. वह
सादगी, देशभक्ति और ईमानदारी का प्रतीक थे.
उनके जीवन में विभिन्न घटनाएं हुई जो जीवन की
सर्वोत्तम शिक्षाएं प्रदान करती हैं. हम में से
अधिकांश भारतीय उन्हें राष्ट्रपति के रूप में जानते
हैं, बहुत से उन्हें भारत के मिसाइल मैन के रूप में जानते
हैं. लेकिन वास्तविकता यह है कि वह इस सब से पहले
एक महान व्यक्ति थे जिसके कारण देश के प्रत्येक
नागरिक द्वारा उनकी प्रशंसा की गयी. वह ऐसे
व्यक्ति थे जिसे इस देश के हर नागरिक द्वारा समान
रूप से सराहा गया और प्यार किया गया. केवल
देशवासियों ही नहीं, बल्कि विदेशियों में भी
कलाम सर के लिए दिल में आदर और स्थान है.
उनकी महानता के उदाहरण कई हैं लेकिन कुछ वास्तव
में प्रेरणा प्रदान करती है. यह अविश्वसनीय है कि
भारत सरकार के महत्वपूर्ण पदों पर रहने के बाबजूद
एक व्यक्ति जीवन के प्रति दृष्टिकोण में इतना
विनम्र, सरल और धरती से जुड़ा हुआ हो सकता है.
एक बार की बात है जब एक बहुत ही महत्वपूर्ण
प्रोजेक्ट लॉन्च के तहत, उनके तहत काम करने वाले
एक वैज्ञानिक ने उनसे जल्दी छुट्टी का अनुरोध
किया क्योंकि वह अपने बेटे को एक प्रदर्शनी में ले
जाना चाहता था. अपने काम में मग्न, उस
वैज्ञानिक को तीन घंटो के बाद महसूस हुआ कि
वह अपना वादा पूरा करना भूल गया. वह निराशा
के साथ अपने घर पहुंचा तो वह यह जानकर चकित
हो गया कि उसका बेटा घर पर नहीं था. कलाम सर
उसके बेटे को प्रदर्शनी दिखाने ले गए थे. यह घटना
उनके कर्मचारियों के प्रति उनकी देखभाल और
विचारशीलता का उच्चतम स्तर दर्शाती है. एक और
घटना में जब उन्हें आईआईटी वाराणसी में एक
संगोष्ठी में जब उनके समक्ष उच्च पद पेशकश की गई,
तो उन्होंने विनम्रतापूर्वक उस पद को ग्रहण करने से
मना कर दिया क्योंकि वह दृढ़ता से
समानता में विश्वास करते थे. वह वास्तव में कई
लोगों के लिए सादगी का एक प्रतीक और प्रेरणा
के स्रोत थे. उनके जीवन के ये उदाहरण हमें उनके
चरित्र की उच्चाईयों के बारे में बताते है. वह अपनी
असाधारण और अचानक मौत से पहले एक पुस्तक पर
काम कर रहे थे.
भारत के राष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल के
दौरान वह भारत का राष्ट्रव्यापी नाम बन गए और
भारत के आम लोगों को भारत के महान पुत्र के बारे
में पता चला. उनका भारत की उन्नत मिसाइल
प्रौद्योगिकी के पीछे बड़ा योगदान है. यहां तक
कि उन्होंने मिसाइल तकनीक में भारत की ताकत
को साबित किया, बल्कि पोखरन -2 परमाणु
परीक्षण की सफल कहानी केवल उनके जैसे
वैज्ञानिकों की वजह से ही संभव हो सकी. चूंकि
भारत की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर अंकल सैम
और सहयोगियों की नज़र थी, इसलिए तत्कालीन
प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी जी ने गुप्त रूप से इस
कार्य को करने के लिए निर्देश दिया. और इस
कार्य को पूरा करने के लिए कलाम सर सामने आये.
उन्होंने और उनकी टीम ने धिपने के लिए सेना की
वर्दी पहनती थी. उन्होंने अपने राष्ट्र के लिए विकट
परिस्थिति में काम किया. बाद में, यह सीआईए
की विफलताओं में से एक है क्योकि वह परमाणु
परीक्षण गतिविधि के बारे में पता नहीं लगा
सके.यह उस व्यक्ति के समर्पण स्तर को दर्शाता है
जिसने इस देश के लिए वास्तव में अपना जीवन
समर्पित कर दिया. उनके जैसे लोग वास्तविक संत हैं
जो खुद राष्ट्र सेवा में समर्पित कर देते है.
हम इस राष्ट्र में उनके महान योगदान के लिए कलाम
सर को सलाम करते हैं और हम भारत को – एक विश्व
शक्ति बनाने में उनके प्रयासों के लिए हमेशा उनके
प्रति ऋणी रहेंगे. राष्ट्र हमेशा डॉ. कलाम को
याद रखेगा. उनके सम्मान के प्रतीक के रूप में
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रामेश्वरम,
तमिलनाडु में एपीजे अब्दुल कलाम के स्मारक का
उद्घाटन किया.

लेखक
अजय कुमार बालोतरा