1
सोने की चिडिया था देश हमारा,
कितावों में पढ़ा ,कहानियाँ सुनी अथाह।
सपना पूरा हो हम सवका फिर से यह,
पाले मन में यही चाह।।

नामुमकिन सा लगता है आज दोस्तो
पूरी होगी कभी यह चाह,
लोग लुटेरे हो गये ,
हर ओर हो रही लूट जेव कटवाते जा,
गैर जिम्मेदार सरकारें हुई,
मुलाज़िम हो गये वेलगाम और लापरवाह।।

न्याय तुल रहा पैसों से,
लालच में डूव चुके हैं गवाह,
धेले का काम नहीं करते जो,
उन की हो रही वाह वाह।।

चन्द दुश्मनों ठिकाने लगाने का हुक्म नहीं मिलता,
बहादुर वीर तुँ सीने पर गोलियाँ खाता जा,
यह कौन सी सुरक्षा नीती है नीतीवानों,
सैनिक शहीद हो रहे रोज़ विल्हा बजह।।

आज नहीं तो कल ,
कमजोरी तुम्हारी तुम्हें डुवोयेगी,
तेज तपस होगी सूरज उगलेगा गर्मी ऐसी,
सह नहीं पाओगे फिर दाह,
कुदरत का पैंतरा कर रहा है हमें अगाह।।