?एक पल में मौत अपनों से दूर करे?
कौन और कब किस को पता
एक पल मे मौत अपनों से दूर करे यहाँ

इंसान रोज़ नई तकलीफों से गुजरता है
कभी हँसता है कभी रोता है

सुकून के लिये यहाँ हर पल
जिंदगी और मौत से लड़ते है

और एक पल मे मौत यहाँ
अपनों से दूर करता है और फ़िर दर्द

कौन जानता है कब हमारा मौत है
कोई मौत के मुँह से भी वापिस आता है

पर जब भी मौत का ख़बर हम सुनते
ऐसा लगता है सब अपने थे

जीते जी हम सब लड़ते है
और मौत ही ऐसा शब्द है जो सबको जोड़ता है

जीवन मे हम किसी के काम ना आये
मौत का नाम सुन कर हजारों का शौक हम मनाते है

काश लोगों को समझ आये
जीते जी भी हम दूसरों की मदत करे

मरने का बाद तो हम कितने ही अपनों
का भला करे सब व्यर्थ है आज

राम भगत

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