*कविता – चूहा और सुरंग*
चूहा
देखने में
कितना छोटा जान पड़ता है
मगर
अपने नुकीले दांतों से
पहाड़ों में भी
निकाल देता है सुरंगें
और वो भी
निशुल्क
और
राजनीतिक क्षेत्र के चूहे
खोद रहे हैं
देश की जड़ें
सुरंगें भी बन रही हैं
मगर
स्विट्जरलैंड के लिए
जिस शहर से
जुड़ना
पहली पसंद है इनकी,
देश में सुरंगें तो नहीं बनीं
बस जमीन खोखली कर दी गई
यहाँ सुरंगें बनाएं भी तो
कैसे?
इनकी भूख
चूहे के जैसे
पेट भरने तक
सीमित नहीं है न।

*दीपक भारद्वाज*

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