एकांत
दुनिया के शोर से,
मुक्ति के लिए,
उस पार,
क्षितिज पे ,
जाने का मन करता है,
हर भोर की पहली किरण,
और ,
डूबते सूरज की मंद लालिमा में,
तन्हाईयाँ जलाने का मन करता है,
कुछ पल पार क्षितिज पे,
एकांत में,
बिताने का मन करता है,
लेकिन तन डरता है,
सुना है कि,
उस पार क्षितिज पे भी,
एकांत से राज छीनकर,
अब,
शोर राज करता है।

वीपी ….

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