सब को मलाई चाहिये।।
वकील को उकसाते देखा,
डाक्टर को ईलाज करवाते देखा,
नाई को वाल कटवाते देखा,
लंगड़े को दौड लगाते देखा,
चले जो कन्धा देने अर्थी को,
उनको भी अर्थी में उठाते देखा,
बाप ने पाला बेटा मदद करेगा,
बेटे के हाथ बाप पिटता देखा,
माँ का दूध भी कमजोर हुआ,
वृद्धाश्रम में माँ को ले जाता देखा,
बाप की फजीहत भी खूव हुई,
बेटा ,बाप को गलत ठहराता देखा,
उस शासक से क्या जनता माँगे,
जो नित कचहरी जाता देखा,
समाजसेवा करता है कोई मन से,
उन पर भी तंज कसता देखा,
मिलता है सबको उतना यारो,
चक्र चले जिसकी जैसा भाग्य रेखा,
कुछ भी नहीं है ठगमठगी मित्रो,
यह तो है वीमार दिलाँ दा भुलेखा,
सब चल रहे हैं चालें अपनी,,जग्गू,,
किसका भला किसने कब है देखा।।

जग्गू नोरिया