आक्रोश
टूट गये सारे सपने
रुठ गई मेरी गुड़िया
दुखी हैं आज सारे अपने
रूठ गई मेरी गुड़िया।

पाल पोस कर बड़ा किया
विद्या का आशीष दिया
गयी थी वो स्कूल पढ़ने
रुठ गई मेरी गुड़िया।

चन्द दैत्य सामने आये
अपना राक्षस रुप दिखाये
चंडी लगी सब पर झपटने
रुठ गई मेरी गुड़िया।

इन्सान फिर हैवान हुए
पल में वो शैतान हुए
चीरहरण लगे वो करने
रुठ गई मेरी गुड़िया।

मृत्युदेव को अर्पित करदी
लाश में परिबर्तित करदी
मानवता लगी फिर मरने
रुठ गई मेरी गुड़िया।

दानव तो थे बने कसाई
नग्न बदन वो छुपा न पाई
आँख से आँसु लगे थे झरने
रुठ गई मेरी गुड़िया।

बहनों की अस्मत कौन बचाये
समाज को आँखें कौन दिलाये
हर बेटी अब लगी है डरने
रुठ गई मेरी गुड़िया।

बहनों को इन्साफ चाहिये
बेटियों को हिसाब चाहिये
कानून लगता गया है चरने
रुठ गई मेरी गुड़िया।

आँख के अँधो होश में आओ
अपनी औकात मत दिखाओ
पाप पड़ेंगे तुमको भरने
रुठ गई है मेरी गुड़िया।

देश बदलो हालात बदलो
कानून बदलो इन्साफ बदलो
दिन दिन हालात लगे बिगड़ने
रुठ गई मेरी गुड़िया।

सहन नहीं होती अब पीड़ा
बन्द करो यह वहशी क्रीड़ा
घर के घर लगे हैं उजड़ने
रुठ गई मेरी गुड़िया।

दिल रोता है क्या करुँ मै
मन के दुख अब कहाँ धरुँ मै
कब लगेगा समाज सुधरने
रुठ गई मेरी गुड़िया।

सुरेश भारद्वाज निराश
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