कह रहे हैं लोग ,मचा है शोर,
नशा , हत्यायें ,चोरी है पकड़े जोर,
मान मर्यादायें शूली चढ़ गईं,
करता क्युँ नहीं कोई विरोध।।
बेटियों को नकारते देखे लोग,
जूस पीये बेटा ,बेटी खाये सुखे रोट,
लाख गुनाह माफ क्युँ,बेटे के करते
करता क्युँ नहीं कोई विरोध।।

जननी ही जब भेद करे,
पूछ सका न सका खुद को रोक,
सीने पर पड़ती रही अदृश्य चोट,
करता क्युँ नहीं कोई विरोध ।।

दुलार प्यार से क्युँ पाला माँ ने,
देख करतूत होता अफसोस,
रोज शाम को रोते देखे वालिद,
करता क्युँ नहीं कोई विरोध ।।

नाम बहन के हो न सम्पति,
लाख जत्न लड़ाते देखे लोग,
झूठी राखी दिखावा है तमोल,
करता क्युँ नहीं कोई विरोध ।।

नकाव चढ़ाये परिवार चले,
लोकलाज में तनिक खामोश,
चैहरा चंचल मन में सर्पदोष,
करता क्युँ नहीं कोई विरोध ।।

आओ नया सवेरा लायें,
मिल बाँट कर काम निपटायें,
वाणी ऐसी बोलिये हो मिठास,
रखता है जग्गू यही तुम से आस।।

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