बचपन के दिन,
बडे हसीन,
न जीने की फिक्र,
न मरने का जिक्र,
रोने से फुर्सत,
तो हंसने में मस्त,
न खुशी अस्त,
न कभी गमग्रस्त,
खाने से फुर्सत ,
तो खिलौनों में मस्त,
हमेशा मस्त ,
सबकुछ पस्त,
न कोई हसरत,
न कोई नफरत,
बड़ा मस्त बचपन अस्त,
बड़ा मस्त बचपन अस्त,
वी पी ठाकुर
कुल्लू