बन जाओ झाँसी की रानी
बचपन में ही जागा गौरव,वह वीरांगना मतवाली थी।
वीरों की करती थी पूजा ,वह देश पे मरने वाली थी।
वह कहती झाँसी दूँगी ना,करती थी वीरों की पूजा।
थी आन बान से जीवित वह, संघर्ष रहा जीवन दूजा।।
वह ज्वाला थी चिन्गारी थी,भारत की राजदुलारी थी।
आजादी की महरानी वह ,भारतमाता की प्यारी थी।।
नमन करो झाँसी की रानी,आजादी की ज्वाला को।
सबला आशा की सरिता ,भारतमाता की माला को।।
ओ भारत की ललनाओं ,कन्याओं भारत की भावी।
अब तो कुछ करके दिखलाओ,बन जाओ झाँसी की रानी।।
Dr. Meena kaushal
U. P.
Gonda
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