दुनिया की आधी अवादी…
आज क्युं परेशान है…
सम्भाला है जिसने हर मर्यादा को…
वही क्युं लोकलाज के लिये होती कुर्वान है..
सब रिश्तों की वह जननी कहलाये..
हर रिश्ते की वह शान है…
भीतर तक न समझा कोई उसे …
न दिया अभी तक समाधान है….
लाज ऱखती सदा कुल की…
फिर भी क्युं वो वदनाम है….
वीर यौद्धा वही जन्मे..
फिर क्युं उसका कत्लेआम है..
पीडा दर पीड़ा वह सहती…
कहीं क्या यही इसका परिणाम है…
सुनता नहीं पीडा कोई उसकी..
इस बात का भी ज्ञान है..
गुणों से भरी . सर्ब शक्ति..
सब रिश्तों का श्रृंगार है..
पूछ रहा ,जग्गू ,तुम सब से आज
बेटियों बचाना किसका कार्यभार है।।