शीर्षक (दोहे)
महनत जो जग में करे, जाता सागर पार।
खड़े रहा जो देखता, डूबा अधबिचकार।
ईर्ष्या कभी न करो, सपरधया आधार।
परिमल यही मंत्र है, इससे बेड़ा पार।
चंद्र धर के गांव में, गुलेरी ही थे एक।
आज उनकी कृपा से, कवि अब मिलें अनेक।
मनुवा यह चंचल बड़ा, बस में कभी न आय।
यत्न से रखो बांध कर, परिमल फिर ना धाय
नंदकिशोर परिमल, गांव व डा. गुलेर
तह. देहरा, जिला. कांगड़ा (हि_प्र)
पिन. 176033, संपर्क. 9418187358