पहाड़ी बाबा कांशीराम
बाबा ने लड़ी खास लड़ाई देश आजादी की थी।
कविताओं छन्दों की गोली प्रहार गहरा कर जाती थी।।
खाई थी कसम देश आजाद करवायेंगे।
वरना ता उमर वस्त्र काले ही पहनते जायेंगे।।

पीड़ा गुलामी की वोह सहन नहीं कर पाते थे।
नये नये पैगामों से आजादी की लौ जगाते थे।।

वोह जितना कर सकते थे हमारे लिये कर गये।
आजाद देश की तस्वीर खास हमें सोंप गये।।

लेकिन कितना संजोया हमने यह विडम्वना थी।
खंडहर होती विरासत बचाना गजव सपना थी।।

उठी पीड़ा मन में यह सत्य लोगों को बताना है।
बाबा जी का पुनीत घर सहज सुन्दर संजोना है।।

लड़ता रहा लड़ाई वीर संग दोस्तों ने हाथ बढ़ाया।
धरोहर बचाने का सुनहरी पैगाम सरकार से आया ।।

आज जीते हैं तुम सच में हे ! पहाड़ी गाँधी बाबा।
तुम्हारे चरनों में प्रणाम मेरा लिख सका यह गाथा।।
जग्गू नोरिया