शीश गंग की धवल धार,है अर्द्ध चन्द्र शोभित प्यारा।
तात विनायक गौरी पति,है कण्ठ हार फणि का न्यारा।।
हरण अमंगल मंगलकारी,है त्रिपुरारी नाम तुम्हारा।
हे भोले कल्याणकरण, गौरा संग दिव्यरूप न्यारा।।
श्रावण मास सुहावन भोले,जन जन का कल्याण करो।
अन्नपूर्णा माता रानी,प्रतिगृह में भण्डार भरो।।
Dr meena kumari
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