राह में तेरी क्या कच्चे घर नही आते,
तभी तुम्हें फकीर नज़र नही आते ।
दाद दूं शर्माने की या मुस्काने की,
शब्द कहने को सनम नज़र नहीं आते ।

इस कदर टूट कर चाहा है दिल ने,
तभी जहां के ताहने नज़र नहीं आते ।

सच बोलना बुरी आदत है हमारी,
झूठ बोलने के बहाने नज़र नही आते ।

पीला दी “दीक्षित” को ऑंखो से इतनी,
मदहोशी मे अब मयखाने नज़र नहीं आते ।

सुदेश दीक्षित
बैजनाथ(कांगडा) (हि प्र )
मो 9418291465