खुद को विश्वास के काबिल /संजीव कुमार सुधांशु

गजल
खुद को विश्वास के काबिल बना न पाये,
खुद की ही बुराइयों को मिटा न पाये |
हमें तो जीने की वो राह दिखाई है उसने,
वक्त जिस पर कदमों के निशां मिटा न पाये |
हमें हमसे मिलाने की मेहरबानी की उसने,
एक हम हैं कि एहसान भी जता न पाये |
सुना है इश्क़ में रूहों का मिलन होता है,
मगर हम दीद की हसरत मिटा न पाये |
वो गमों का समन्दर जब्त करते रहे,
हम आंख में एक अश्क भी छुपा न पाये |
हमारी वफा में जरूर कोई कमी थी सुधांशु,
जो खुद को कभी उनकी जगह बैठा न पाये |

संजीव कुमार सुधांशु
गांव व डा. च्वाई त. आनी जिला कुल्लू.. 70188-33244

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