नूरपुर हादसे के नन्हे बच्चों को समर्पित/अजय

आज का मंजर देख कर हर एक आंख नम तो हुई होगी,
जिस मां ने बड़े लाड़ प्यार से अपने जिगर के टुकड़े को स्कूल भेजा होगा हर वह मां रात को सोयी कैसे होगी,
हर वह पिता जिसने अपने लाल के लिए ना जाने कितने सपने संजोए होंगे, उसने अपने जिगर के टुकड़े की लाश कंधे पर उठाइ कैसे होगी,
हर दादा – दादी, नाना – नानी की यह रात सबसे दर्दनाक तो हुई होगी,
हर वह गली और आंगन जहाँ कभी इन बच्चों का चहकना, महकना, खेलना व कुदना होता होगा, आज सूनापन तो महसूस किया होगा,
वह स्कूल, वह क्लासरूम जहाँ इन बच्चों की नन्हीं नन्ही आंखों ने ना जाने कितने ख्वाब देखें होंगे, अपनी किस्मत पर रोया तो होगा,
इन नन्हे मुन्ने बच्चों की चीख पुकार सुनकर एक बार के लिए तो मौत भी सिहर उठी हुई होगी,
मिले गर खुदा तो पूछूंगा जरूर, क्या वजह रही होगी इन बच्चों की किस्मत में जो इतना बुरा लिखा होगा ।।।

नुरपुर हादसे में शिकार हुए बच्चों को समर्पित कविता
भगवान इनकी आत्माओं को शांति बख्शें

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