दर्द को कैसे सिया होगा

अपने जिगर के टुकड़े को
कैसे कैसे उठाया होगा

माँ बाप ने उस दर्द को
कैसे सिया होगा

कुदरत के इस दर्द को
कैसे सह लिया होगा

भगवान तुम कैसे
निर्दय हो सकते हो

ऊन बच्चों की माँ बाप का
जख्म कैसे भर दोगे

कसूर क्या था जो इस तरह
बच्चों से सँसार छीन लिया

दर्द ऐसा देना था
तो सँसार ही क्यू दिखया

चट्टान बन गई है
अब ऊन माताओं की छाती

रोते बिलखते आँसूओं से
आँखे सूज गई है

केसी ये परीक्षा तेरी एक ही दिन में
कई माँ की गोद करदी खाली

दर्द को कैसे सिया होगा
जिगर के टुकड़े को तब कैसे उठाया होगा

नूरपूर हादसे से हम सब को बहुत बड़ा
दर्द मिला है आओ ऊन बच्चों के माता पिता
हौसला और हिम्मत मिले मिल कर प्रभु से प्राथना करे

ओम शाँति राम भगत किन्नौर