ग़ज़ल
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साथ तेरा जो छूटा तो मर जायेंगे
तेरे बिन हम भी यूँ ही विखर जायेंगे

तुमको पाना तो था मेरे बस में नहीं
मिल सके जो न तुम तो किधर जायेंगे

मेरी किस्मत का है खेल यह जान लो
तेरे बिन जीने से हम तो डर जायेंगे

रास्ते सारे लगता है अब बंद हैं
हम अकेले बता किस डगर जायेंगे

क्या बतायें हैं कितने दुखी यार हम
अक्स तेरा दिखेगा जिधर जायेंगे

जो गले से न तुम ने लगाया हमें
विन तेरे हम “निराश” किसके घर जायेंगे

सुरेश भारद्वाज निराश
9805385225