सुशिक्षा गीत

अच्छी राह पर सदा चलें हम,
औरों को भी चलना सिखाएं।
स्वयंसेवी यदि बन गए हैं तो,
राष्ट्र सेवा हम कर के दिखाएं।।

स्वार्थ को नहीं प्राथमिकता दें,
निस्वार्थ भाव का अलख जगाएं।
रंग रूप जाति धर्म भेद त्याग,
एकता का ही संदेश फैलाएं।।

निबल वर्ग की सदा सेवा कर,
पुण्य कमाएं औअच्छे कहाएं।
शिक्षार्थी बस शिक्षा लें दें,
ज्ञान प्रकाश चहुंओर फैलाएं।।

भाव दबे छुपे अन्दर जो भी,
प्रकट करें कुछ कर के दिखाएं।
समझें निज क्षमताएं को जानें,
कर्म सुकर्म ही कर के दिखाएं।।

सर्वांगीण विकास सुशिक्षा से,
समृद्ध स्वच्छ समाज बनाएं ।
मानवता को उच्च स्थान दे,
“भरत”मनुज हम बनके दिखाएं।।

रचयिता
विजयी भरत दीक्षित
सुजानपुर टीहरा (हि.प्र.)
9625141903