लीक से हटकर/सुरेश भारद्वाज निराश

लीक से हटकर

भ्रष्टाचार की बली चढ़ गया देश का ईमानं यारो
गली गली बिक रहाअब मौत का सामान यारो।

क्या करें जायें कहां ब्यथा अपनी सुनायें किसे
जिएं मरें अपनी बला से धरे न कोई कान यारो

कह रही थी अम्मा मुझसे बेटा हम आज़ाद हो गये
आज तक जो देखा पाया हम लगें गुलाम यारो

देश के कानून भी अब वेसुरे से लगने लगे है
संसाधनों के वदले में बिक न जाये इन्सान यारो

जाऊँ जिस भी दफत्तर में हैरत से देखें सभी
जेव में हैं दस आई डी फिर भी नहीं पहचान यारो

सबसिडि की भीख ने सबको निकम्मा कर दिया
वोट का है खेल सारा यह योजना कल्याण यारो

सड़ रहा खेतों में अन्न बचाने बाला कोई नहीं
गरीव जाये भाड़ में हैं भरे पड़े गोदाम यारो

उल्टे पुल्टे ब्यानों कारण खून खौले जनता का
अपने ही हाथों लुट रहा मेरा देश महान यारो

कारनामे दिन व दिन काले ही होते हैं जा रहे
गरीव का भूखा वदन है हो रहा बेजान यारो

इज्जत बहन बेटियों की अब हम करते नहीं
छीन ली है हमने उनके चेहरे से मुस्कान यारो

माँ बाप भी हैं खो गये बृद्धाश्रम की भीड़ में
उनके बिना हो गयी सुखी अब तो संतान यारो

बहशीपन नंगा हुआ है शर्म की दिवार गिर गई
लग रहा है आदमी अब हो गया है हैवान यारो

आदमी को आदमी अब आदमी समझता नहीं
रहा आदमी न आदमी है कोसता भगवान यारो

अपनी अपनी कर रहा अब हर कोई है देश में
मजाक बन कर रह गया आज संविधान यारो

संसद की गरिमा को हमने है ताक पर रख दिया
होना चाहिये जिस पे हमें सदा ही अभिमान यारो

जला नहीं पाऊँगा मैं तेरी बेगैरत सी लाश को
दुखी होकर कह गया निराश मुझे शमशान यारो

नव वर्ष की बधाई सबको मेरी ओर से महामनो
बीता जो खुशी से बीता है आपका अहसान यारो

सुरेश भारद्वाज निराश
लोअर बड़ोल धर्मशाला
176057
9805385225

जय हनुमान/पंडित अनिल

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