जय हनुमान/पंडित अनिल

जय जय हनुमान गुंसाई

हनुमान से प्रीति लगा लो,
सियाराम मिल —जायेंगे ।
जनम जनम के मैल –पाँप,
संताप सभी धुल –जायेंगे।।

जिनके हिय सियाराम बसें,
वो हनुमान कहलाते —–हैं।
मन में बैठे रावण दल –को,
पल में धूल – – – चटाते हैं।।

हनुमान की किरिपा से ,
किश्मत ताले खुल जाते हैं।
जनम जनम • • • • • • •

धर्म ध्वजा अर्जुन के रथ ले,
बैठ गये हनुमत ——-प्यारे।
जीत मिली पांडव को, दल,
बल कौरव के सारे –हारे।।

भूत-प्रेत सब काँपे निशदिन,
निशिचर खल भय खाते हैं।
जनम जनम • • • • • • • • •
संताप • • • • • • • • • • • • •

पंडित अनिल

अहमदनगर , महाराष्ट्र
8968361211

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