शहीदी दिवस

स्वर्ण अक्षर जटित शहीदी दिवस हुआ कुछ यारों से।
सर्वस्व लुटाकर ली आजादी देश बचा गद्दारों से।।

हाहाकार मची भारत में दुश्मन की तलवारों से।
बच्चा बच्चा सहम उठा गोरे अत्याचारों से।।

एक हुएऔर विगुल बजाया डरे नहीं
सरकारों से।
भौचक्के अंग्रेज हो गए इन वीरों के वारों से।।

वीर सपूतों ने टक्कर ली अंग्रेजी सरकारों से।
राष्ट्रभक्त कुछ आगे आए बदली सरकार विचारों से।।

सुखदेव भगत सिंह राजगुरु शेखर के आचारों से।
अंग्रेज सरकार डरने लगी इन वीरों के व्यवहारों से ।।

ब्रिटिश अदालत ने दी फांसी न पूछा तक दीवारों से।
हंसते-हंसते झूल गए झुके न अत्याचारों से।।

रोज करें ‘भरत’ नमन लें आशीष सिपहसलारों से।
हंसते-हंसते चढ़े जो सूली उन भारत के प्यारों से।।

रचयिता
विजयी भरत दीक्षित
सुजानपुर टीहरा हिमाचल प्रदेश
96 25141 903