बेटियां……

घर को स्वर्ग बनाती हैं बेटियाँ
वंश को वंशज देती हैं बेटियाँ,,!
न करे परवाह आत्म सम्मान की
माता पिता को सम्मान दिलाती हैं बेटिया़़़ँ,,!

अन्धेरे में रोशनी हैं बेटियाँ
डूबते को तिनका हैं बेटियाँ
चाहत की न आस रखे
प्यार फैलाती हैं बेटियाँ ,,!

बाग़ बगिया बनाती हैं बेटियाँ
सूखे फूल खिलाती हैं बेटियाँ
रोते को पल भर में हँसाए
खुद घुटती जाती हैं बेटियाँ,,!

छोड़ जाती है बाबुल की गलियां
घर गैरों का सजाती हैं बेटियाँ
दफ़ना कर अरमान अपने
जहाँ जमें मुस्कराती हैं बेटियाँ,,!

कभी हंसे कभी रोए ,
हौंसला बिन खोये ,
जमाना अब गर्भ में,
मिटाए पल भर में
हैवान बन जाये
खिलने दो नन्ही सी कली को ;
जिससे एक बगिया और महकाए …,,!

मौलिक व अप्रकाशित रचना
अनिल कुमार
तिसा चम्बा
मो 0 न0 9816739612

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