माँ/डॉ कुलभूषण व्यास

माँ
शिशु के हंसने पे वो हसती
उसके रोने पे रोती है।
प्यार से सतत निहार उसे
अनगिनत ही सपने संजोती है।
मंदिर की देवी से उत्तम
सब की ममतामयी माँ होती है।।

करुणामयी माँ ने ही हमको
यह दृश्य जगत दिखलाया है।
बालक की उंगली थाम के ही
धरती पग धरना सिखाया है।
माँ कहलाती है प्रथम गुरु
गुरु से पूर्व बंदन पाती है।
मंदिर की देवी से उत्तम
सबकी ममतामयी माँ होती है।।

माता की महिमा न्यारी है
अनमोल अति और प्यारी है।
माँ के चरणों में स्वर्ग बसे
माँ की महत्ता अति भारी है।
उपकार हैं माँ के इतने बड़े
गुरुता भी शरमा जाती है।
मंदिर की देवी से उत्तम
सबकी ममतामयी माँ होती है।।

माँ सिद्धि भी है माँ बुद्धि है
माँ सकल ऐश्वर्य की दात्री है।
माँ लक्ष्मी है माँ दुर्गा है
माँ शारदा है माँ गायत्री है।
माँ की प्रतिष्ठा गरिमामयी
गरिमा स्वंय में ही लजाती है।
मंदिर की देवी से उत्तम
सबकी ममतामयी माँ होती है।।

जिस घर में जननी बसती है
रिद्धि सिद्धि वहां रमती है।
घर देवलोक सा हो जाता
अज्ञान वहाँ से हट जाता।
भगवान के बदले माँ होती
प्रभु के सम पूजि जाती है।
मंदिर की देवी से उत्तम
सबकी ममतामयी माँ होती है।।

माँ की सेवा हम नित्य करें
पीड़ादायी न कृत्य करें।
माँ स्वर्ग से बढ़कर होती है
इस कथन को न असत्य करें।
सत्कर्म करो आगे ही बढ़ो
आशीष यही दोहराती है।
मंदिर की देवी से बढ़कर
सब की ममतामयी माँ होती है।।

भूषण” तू भाग्यशाली हैं है
जिस के घर में माँ जीवित है।
पूछो उससे माँ की महता
जिसने है खोई निज माता।
जब लगती ठोकर पंथ पे है
जिव्हा माँ को ही बुलाती है।
मंदिर की देवी से उत्तम
सबकी ममतामयी माँ होती है।।

स्वरचित/अप्रकाशित
डॉ कुलभूषण व्यास
अनाडेल शिमला हि प्र
📞9459360564

जगती जोत है माँ ज्वाला जानिए पूरी कथा


आज नवरात्रो में माता रानी के गुणगान में ऑनलाइन पत्रिका भारत का खजाना में पढ़िए माता ज्वाला जी की ये अदभुत कथा। जय माता दी।🙏🏻

शक्तिपीठ माँ ब्रजेश्वरी देवी मंदिर कांगड़ा/Ashish Behal

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