नव संवत्सर 2075 की अनंत शुभकामनाएँ

नव संवत्सर शुक्ल चैत,
प्रतिपद नव वर्ष हमारा।
लता पताका फहराती,
पादप नव किसलय प्यारा।।

रजनी का राज्य तमस सिमटे,
नभ सूरज सिंदूरी का वंदन।
द्वार खड़े हैं राम शक्तिमय,
हर्षित हो करिये अभिनंदन।।

ब्योम राममय हो जाये,
धरती दुल्हन सी सज जाये।
प्रकृति सुंदरी कर सिंगार,
पुलकित मन से मुस्काये।।

पंडित अनिल
मौलिक, स्वरचित, अप्रकाशित
अहमदनगर, महाराष्ट्र
8968361211